ताज़ा खबर
 

बिहार में NDA के मिशन 2019 का आगाज आज से, 10 साल बाद फिर चुनावी मंच पर साथ आएंगे मोदी-नीतीश

पटना के गांधी मैदान में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 साल बाद एक साथ राजनीतिक मंच साझा करेंगे। गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक तनातनी रही थी लेकिन हाल ही में तेवर काफी बदल गए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

2019 Lok Sabha Election चुनाव से पहले लंबे समय बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साथ राजनीतिक मंच साझा करेंगे। रविवार को पटना के गांधी मैदान में दोनों दिग्गज करीब 10 साल बाद एक साथ होंगे। उल्लेखनीय है कि बिहार में पिछला विधानसभा चुनाव एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने के बावजूद अब बीजेपी-जेडीयू दोनों साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं। 40 सीटों वाले बिहार में दोनों पार्टियां 17-17 सीटों पर लड़ रही हैं। गठबंधन के छह अन्य सीटें रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में गई हैं।

गौरतलब है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक तनातनी रही थी लेकिन हाल ही में तेवर काफी बदल गए हैं। इससे पहले 2009 के आम चुनाव के वक्त लुधियाना में नीतीश ने तत्कालीन गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया था। उस वक्त लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। नीतीश कुमार के करीबी नेता कहते हैं कि शुरू में तो वे वहां जाना ही नहीं चाहते थे क्योंकि उस मंच पर नरेंद्र मोदी आने वाले थे। उन्होंने शरद यादव से कह दिया था कि वे लुधियाना की चुनावी सभा में चले जाएं, लेकिन आखिरी वक्त में अरुण जेटली के जोर देने पर वे संजय झा के साथ लुधियाना पहुंचे थे।

जब कैंसिल हुआ था डिनर : 2010 में नरेंद्र मोदी जब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पटना आए तो तय हुआ था कि नीतीश कुमार भाजपा नेताओं के लिए डिनर का आयोजन करेंगे। लेकिन उसी दिन गुजरात सरकार की ओर से बिहार की बाढ़ में 5 करोड़ रुपए की मदद का विज्ञापन तमाम अखबारों में छपा था, जिससे नीतीश नाराज हो गए और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया। उन्होंने उस विज्ञापन को बिहार का अपमान करार दिया था।

 

ये दो घटनाएं बताती हैं कि नीतीश कुमार वैचारिक रूप से नरेंद्र मोदी के कितने खिलाफ थे। यही खिलाफत 2013 में नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने की वजह बनी क्योंकि भाजपा ने उस वक्त नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। यही नहीं, नीतीश कुमार ने संघ मुक्त भारत बनाने का भी आह्वान किया था तो नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठाया था। मोदी के इस आरोप का भावनात्मक दोहन करने के लिए नीतीश कुमार ने बिहार से नाखून और बालों का सैंपल नरेंद्र मोदी को भेजा था।

अब बदल गए हैं हालात: अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। नीतीश कुमार न केवल नरेंद्र मोदी के साथ सियासी मंच साझा करने को तैयार हैं, बल्कि वह इस साल होने वाले आम चुनाव में एनडीए की जीत और मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी भी कर चुके हैं। नीतीश कुमार के इस बदले हुए नजरिए को विपक्षी पार्टियों ने तल्ख टिप्पणी की है। लंबे समय तक जेडीयू में रहे (फिलहाल आरजेडी में) वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं, 2013 में वह एनडीए से इसलिए नहीं हटे थे कि उन्हें भाजपा से परहेज था। वह इसलिए अलग हुए थे कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था। अगर उस वक्त आडवाणी को उम्मीदवार बनाया जाता, तो वह एनडीए से अलग नहीं होते।

वह आगे कहते हैं, ‘वह मान रहे थे कि नरेंद्र मोदी का पूरा व्यक्तित्व वोटों का ध्रुवीकरण करने वाला रहा है और यह देश के लिए ठीक नहीं है। इसी आधार पर वह हटे थे। क्या अब नीतीश कुमार मान रहे हैं कि उनका व्यक्तित्व वैसा नहीं है।’ ऐसा ही सवाल उनसे बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने जो सोच कर एनडीए छोड़ा था, वैसा कुछ उन्हें नहीं दिखा।

नीतीश की मजबूरी : राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा सियासी हालात के कारण नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ बने हुए हैं। पिछले दिनों नीतीश कुमार ने कहा था कि बिहार में एनडीए का प्रदर्शन वर्ष 2009 से बेहतर होगा। वर्ष 2009 के आम चुनाव में एनडीए को 32 सीटें मिली थीं जबकि आरजेडी के खाते में चार और कांग्रेस के खाते में दो सीटें गई थीं।

पटना के वरिष्ठ पत्रकार दीपक मिश्रा कहते हैं, ‘नीतीश कुमार इतनी बार गठबंधन बदल चुके हैं कि अब उन पर सियासी पार्टियों का भरोसा नहीं है। ये बड़ी वजह है कि अब उन्हें नरेंद्र मोदी या दूसरे नेताओं के साथ सियासी मंच साझा करने में कोई ऐतराज नहीं है।’ गौरतलब है कि अपने शुरुआती दिनों में नीतीश कुमार ने सीपीआई के साथ भी गठबंधन किया था। बाद में एनडीए का हिस्सा बने। एनडीए को छोड़ कर वर्ष 2015 में आरजेडी के साथ चुनाव लड़ा और वर्ष 2017 में आरजेडी को छोड़ वापस एनडीए में आ गए।

पटना से उमेश राय की रिपोर्ट

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सीमा पर तनाव को लेकर उठाए थे सवाल, ABVP ने घुटनों पर लाकर प्रोफेसर से मंगवाई माफी
2 आज से फिर शुरू होगी समझौता एक्सप्रेस, भारत-पाक तनाव के चलते हुई थी बंद
3 ‘टूट जाएगा डंका, फुस्स हो जाएंगी प्रियंका’ पीएम मोदी के अमेठी दौरे से पहले लगे होर्डिंग