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कांग्रेस के दो विधायकों समेत कई पार्षदों ने तृणमूल का दामन थामा

प्रदेश कांग्रेस से नाता तोड़ कर सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस में जाने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

Author कोलकाता | September 30, 2016 1:02 AM

प्रदेश कांग्रेस से नाता तोड़ कर सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस में जाने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को दो विधायकों समेत कई पार्षदों के तृणमूल में शामिल होने से पार्टी को भारी झटका लगा है। इसकी वजह से कांग्रेस की नियंत्रण वाली दो नगरपालिकाओं पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हो गया है। मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले लोग ममता बनर्जी के विकास के एजंडे से प्रभावित होकर ऐसा कर रहे हैं। उत्तर दिनाजपुर जिले में इस्लामपुर के विधायक कानाईलाल अग्रवाल और नदिया जिले के कालियागंज के विधायक हसनुज्जमान अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। बीते दो महीनों के दौरान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मानस भुइयां समेत कांग्रेस के तीन विधायक तृणमूल में शामिल हो चुके हैं। मुर्शिदाबाद नगरपालिका के 11 कांग्रेसी पार्षदों की सहायता से नगरपालिका पर कब्जा कर तृणमूल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी को करारा झटका दिया है। मुर्शिदाबाद को अधीर का गढ़ माना जाता है। इससे पहले 15 सदस्यों वाली मुर्शिदाबाद नगरपालिका में तृणमूल कांग्रेस का महज एक पार्षद था।

यह तादाद अब बढ़ कर 12 हो गई है। अब मुर्शिदाबाद में कांग्रेस के पास महज दो नगरपालिकाएं बची हैं जबकि बाकी पांच पर तृणमूल का कब्जा हो गया है। उत्तर दिनाजपुर जिले की कालियागंज नगरपालिका के अध्यक्ष और कई पार्षदों के तृणमूल में शामिल होने की वजह से इस नगरपालिका पर भी पार्टी का कब्जा हो गया है। अभिषेक ने इस मौके पर पत्रकारों से कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले माकपा के साथ हाथ मिलाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक लिहाज से आत्मघाती कदम साबित हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि राज्य के लोगों ने भी इस गठजोड़ को खारिज कर दिया है और इस साल के आखिर तक बंगाल में कांग्रेस व माकपा की राजनीतिक मौजूदगी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में आने वाले ममता बनर्जी की ओर से शुरू विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं।

ध्यान रहे कि इससे पहले तृणमूल ने मालदा व जलपाईगुड़ी जिला परिषदों पर कब्जा कर कांग्रेस व वाममोर्चा को गहरा झटका दिया था। अंतरकलह व पलायन से जूझ रही कांग्रेस व माकपा के सामने अब अपने बचे-खुचे नेताओं को संभालने की चुनौती है। विधानसभा चुनावों के बाद से ही इन दोनों दलों के नेताओं में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की होड़ मची है।

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