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15 को खुलेगा सिख कत्लेआम की याद में बना स्मारक

नवंबर 1984 में हुए सिख कत्लेआम की याद में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बनाए गए सच की दीवार नामक स्मारक को मानवता को समर्पित करने के लिए कमेटी ने उल्टी गिनती शुरू कर दी है।

Author नई दिल्ली | January 7, 2017 1:40 AM
(EXPRESS ARCHIVE )

नवंबर 1984 में हुए सिख कत्लेआम की याद में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से बनाए गए सच की दीवार नामक स्मारक को मानवता को समर्पित करने के लिए कमेटी ने उल्टी गिनती शुरू कर दी है। 15 जनवरी 2017 को खुलने जा रहे इस स्मारक में शुक्रवार को अकाल पुरख के शुक्राने के तौर पर अखंड पाठ साहिब की शुरुआत की गई, जिसकी समाप्ति 8 जनवरी 2017 को होगी।  साढ़े तीन साल के भीतर बनकर तैयार हुए इस स्मारक की आड़ी-तिरछी दीवारों पर कत्लेआम के दौरान मारे गए लगभग 3 हजार सिखों और सिखों को बचाने के दौरान अपनी जान गंवाने वाले 2 हिंदुओं और एक मुस्लिम महिला का नाम भी उकेरा गया है। इन दीवारों के बीच 4 ढांचे समानता, मानवता, विन्रमता और सहनशीलता के प्रतीक के रूप में बनाए गए हैं। इसके साथ ही लगभग 250 दर्शकों की क्षमता वाला एक ओपन एअर थिएटर भी बनाया गया है, जिसमें शाम के समय लाल रंग की लेजर लाइट आसमान की ओर कई मील कर रोशनी छोडेगी।

कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके और महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस स्मारक को कौम की ऐतिहासिक धरोहर बताया है। जीके ने कहा कि लंबी जद्दोजहद के बाद बना यह स्मारक ऐतिहासिक होने के साथ ही कत्लेआम के बारे में आने वाली पीढ़ियों को जानकारी देगा और सिखों को बचाने के दौरान अपनी जान गंवाने वाले तीन बहादुर गैर सिख मददगारों की कहानी को भी अमर कर देगा।

स्मारक की दीवारों को दिल्ली की गलियों के रूप में परिभाषित करते हुए जीके ने नवंबर 1984 में सिखों की ओर से गलियों में भाग कर जान बचाने की मजबूरी में की गई कोशिश को आड़ी-तिरछी दीवारों से जोड़ा। जीके ने दावा किया कि स्मारक को देखने आने वाले देसी-विदेशी पर्यटक इसकी खूबसूरती व डिजाइन के कायल हो जाएंगे।
वहीं मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 32 साल के दौरान सिख कौम को जो इंसाफ नहीं मिला उस पर स्मारक में स्थापित संबंधित ढांचे कटाक्ष करते नजर आएंगे। बेशक हम पर अत्याचार हुआ, लेकिन फिर भी 1984 के बाद हमने सिख कौम के बुनियादी सिद्धांतों समानता, मानवता, विन्रमता व सहनशीलता का साथ नहीं छोड़ा। सिरसा ने संगत को 15 जनवरी के बाद स्मारक दर्शन के लिए अपने बच्चों के साथ आने का भी संदेश दिया। इस मौके पर कमेटी के मुख्य सलाहकार कुलमोहन सिंह, प्रोजेक्ट कमेटी के चेयरमैन तनवंत सिंह, कमेटी सदस्य हरदेव सिंह धनोआ व जीत सिंह खोखर मौजूद थे।

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