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सज्जन, अन्य आरोपी वहन करेंगे वीडियोग्राफी का खर्च

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में मुकदमे का सामना कर रहे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और दो अन्य लोगों ने मंगलवार को सुनवाई कर रही अदालत को बताया कि वे मामले की सुनवाई की वीडियोग्राफी का खर्च वहन करने के लिए तैयार हैं..

Author नई दिल्ली | December 9, 2015 2:10 AM
सज्जन कुमार (फाइल फोटो)

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में मुकदमे का सामना कर रहे कांग्रेस नेता सज्जन कुमार और दो अन्य लोगों ने मंगलवार को सुनवाई कर रही अदालत को बताया कि वे मामले की सुनवाई की वीडियोग्राफी का खर्च वहन करने के लिए तैयार हैं। जिला न्यायाधीश अमरनाथ के समक्ष पेश तीनों ने कहा कि वे एक शपथपत्र दे रहे हैं कि यहां होने वाली सुनवाई की वीडियोग्राफी का वे खर्च वहन करेंगे। जिला जज अमरनाथ की अदालत को मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़कड़डूमा अदालत से स्थानांतरित की है।

जज ने कहा कि यदि आप खर्च उठाने को तैयार हैं, मैं इस पर आदेश पारित करने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि सुनवाई की वीडियोग्राफी कराने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी। अदालत ने कहा कि व्यवस्था (वीडियोग्र्राफी की) के कामकाज की जांच करने के लिए मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी 2016 निर्धारित की जाती है। अदालत ने साथ ही कहा कि उस दिन गवाहों को समन करने की जरूरत नहीं है। हाई कोर्ट ने मामले को पटियाला हाउस अदालत को स्थानांतरित करते हुए जिला जज को सुनवाई की वीडियोग्राफी आरोपियों के खर्च पर कराने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान जज ने यह भी कहा कि वीडियो रिकार्डिंग व्यवस्था इस अदालत में उपलब्ध नहीं है और उन्हें ऐसी सुविधा तैयार करने के लिए कंप्यूटर शाखा से मशविरा करना होगा। कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता आइ यू खान ने कहा कि सुनवाई की वीडियोग्राफी का अनुरोध इसलिए किया गया था ताकि पक्षों का किसी पूर्वाग्रह से संरक्षण किया जा सके। सुप्रीम अभियोजक डीपी सिंह और दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूल्का ने सुझाव दिया कि जो कंपनी अदालत में वीडियोग्राफी सेवा मुहैया कर रही थी उसे ही इस मामले के लिए बुलाया जा सकता है क्योंकि वह एक विश्वास करने लायक कंपनी होगी। सज्जन कुमार, ब्रह्मानंद गुप्ता और वेद प्रकाश यहां सुल्तानपुरी में सुरजीत सिंह की हत्या के मामले में हत्या और दंगा करने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। मामले की सुनवाई इससे पहले तब स्थगित कर दी गई थी जब पीड़ित और शिकायतकर्ता जोगिंदर सिंह ने यह आरोप लगाते हुए मामले की सुनवाई दूसरे अदालत में स्थानांतरित करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि सबूत ठीक तरह से दर्ज नहीं किया जा रहा है।

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