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Chandigarh: पिछले 5 सालों में 163 बार हुआ पुलिस पर हमला, 48 लोग हुए दोषी साबित तो 32 हुए बरी

पिछले पांच सालों में चंडीगढ़ पुलिसकर्मियों पर हमले के 163 मामले सामने आए हैं। एसएसपी नीलांबरी जगदले ने कहा, 'हमें हमारी ड्यूटी करते वक्त जो भी परेशान करेगा उसके खिलाफ 'नो टोलेरेंस पॉलिसी अपनाई' जाएगी।

Author Updated: April 5, 2019 5:19 PM
चंडीगढ़ में पिछले पांच सालों में खाकी पर दर्ज हुए 163 मामले फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

पिछले पांच सालों में चंडीगढ़ पुलिसकर्मियों पर हमले के 163 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 32 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया जबकि 48 को दोषी ठहराया गया। इसके साथ ही अदालत में 65 मामलों में सुनवाई चल रही है और आठ घटनाओं में पुलिस को अदालत में चार्जशीट पेश करनी है। वहीं पांच मामलों में जांच एजेंसी को कोई सफलता हासिल नहीं हो सकी।

ज्यादातर मामले ट्रैफिक पुलिस पर हमले केः पुलिस की मॉडस ऑपरेंडी टीम के मुताबिक साल 2014 से लेकर साल 2018 तक के डाटा के मुताबिक 163 में से 55 मामले ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर हमले के दर्ज किए गए। चंडीगढ़ पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल शुभकरण सिंह के अपहरण और प्रताड़ित करने के आरोपों में दो भाईयों को हाल ही में बरी किया गया था। पिछले तीन महीनों में तीन अलग- अलग तरह के मामले सामने आए हैं। इनमें धनस के एक अजय नाम के व्यक्ति द्वारा सेक्टर 44/45/51/52 लाइट प्वाइंट पर एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी को घसीटे जाने, सेक्टर 28 मोटर मार्केट में हिमाचल निवासी रोहित पटियाल द्वारा एक कॉन्स्टेबल सोनू के साथ कथित मारपीट, सेक्टर 45 में चेक प्वाइंट पर एक ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल राजेश कुमार को मारने और ड्यूटी करने से रोकने का प्रयास करने का मामला शामिल है।
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आरोपी का बयानः आरोपी रोहित पाटियाल ने बताया, ‘मैं अपने कार के स्पीकर की आवाज को चेक कर रहा था, जब एक पुलिसकर्मी ने मुझे वॉल्यूम कम करने को कहा। इसके बाद पुलिसकर्मी ने मेरी आईडी मांगी। जब मैंने आपत्ति जताई तो उन्होंने मुझे एक झूठे मामले में फंसा दिया।’ आरोपी के वकील राजेश सिंगला ने बताया कि साल 2016 में उनके मुव्क्किल द्वारा चौकी पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी को नहीं रोका  था। उन्होंने कहा कि नाके पर कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था। पुलिस और उनके मुव्वकिल के बीच केवल चालान को लेकर बहस हुई थी। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में भी मामूली चोटों का जिक्र है, इसलिए मेरे मुव्क्किल को सबूत कमजोर होने के चलते बरी कर दिया गया।

 

पुलिस का क्या है कहना: इस पूरे मामले पर एसएसपी नीलांबरी जगदले ने कहा, ‘वर्दी वाले लोगों की स्थिति हमेशा कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल चंडीगढ़ तक ही सीमित नहीं है। हमें हमारी ड्यूटी करते वक्त जो कोई भी परेशान करेगा उनके खिलाफ ‘नो टोलेरेंस पॉलिसी अपनाई’ है। इनमें कुछ मामलों में आरोपी बरी हुए है और कुछ मामलों में पंजाब और हरियाणा में अपील दायर की गई है जिसकी समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा अगर आंकड़ों को देखा जाए तो बरी किए गए आरोपियों के मुकाबले दोषी साबित हुए लोगों की संख्या ज्यादा है। ‘ जानकारी के मुताबिक अब तक सेक्टर 17, 34 और सेक्टर 36 के पुलिस स्टेशनों में पुलिस कर्मियों पर हमले के सबसे ज्यादा 22 मामले दर्ज किए गए है।

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