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राहुल गांधी के भाषण को 16 साल की लड़की ने मंच पर ही मलयालम में किया ट्रांसलेट, सोशल मीडिया पर ऐसे हुई तारीफ

राहुल गांधी ने अपना भाषण शुरू करने से पहले उन्होंने मलयालम में अनुवाद करने के लिए किसी पूछा तो 16 साल की सफा ओडला ने इसे स्वीकार किया। छात्रा ने बिना घबराहट के अपना काम पूरा किया।

Author तिरुवनंतपुरम | December 6, 2019 3:58 PM
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ 12वीं की छात्र सफा, फोटो सोर्स- पीटीआई

केरल की वायनाड सीट से सांसद कांग्रेस नेता राहुल गांधी गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र में थे। इस दौरान उन्होंने मलप्पुरम स्थित एक सरकारी स्कूल में भाषण दिया, जहां उनके भाषण का मलयालम अनुवाद 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने किया। इस ट्रांसलेशन को लेकर छात्रा को सोशल मीडिया पर काफी तारीफ मिल रही हैं। वहीं, राहुल गांधी ने खुद भी भाषण का अनुवाद करने वाली लड़की की सराहना की। बता दें कि छात्रा ने राहुल गांधी के अंग्रेजी में दिए भाषण को मलयालम में अनुवाद किया था।

सफा ने किया भाषण का अनुवाद: राहुल गांधी गुरुवार (5 दिसंबर) को करुवाराकुंडु गांव में सरकारी व्यावसायिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक विज्ञान प्रयोगशाला के उद्घाटन के दौरान छात्रों को संबोधित कर रहे थे। अपना भाषण शुरू करने से पहले राहुल ने मलयालम में अनुवाद करने के लिए किसी को मंच पर आने के लिए पूछा। इसके बाद 16 साल की छात्रा सफा ओडला मंच पर गई और बिना किसी घबराहट के उनके भाषणा का अनुवाद किया।

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राहुल गांधी ने अनुवाद के लिए पूछा: दरअसल अपना भाषण शुरू करने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि मैं अंग्रेजी में बोलना चाहता हूं। लेकिन मैं चाहता हूं कि कोई इसे मलयालम में अनुवाद करे। क्या कोई छात्र है, जो अनुवाद कर सकता है?

छात्रा को दी बधाई: मंच पर नेता और छात्र को देखकर सफा मंच पर चली गई। राहुल गांधी ने सफा को पहले धन्यवाद दिया। फिर उन्होंने अपना भाषण शुरू किया। मदरसा शिक्षक की बेटी सफा ने बिना किसी घबराहट के भाषण का तुरंत अनुवाद किया। राहुल गांधी ने मंच छोड़ने से पहले इसके लिए लड़की को बधाई और मिठाई दी।

सफा बनी सोशल मीडिया स्टार: बता दें कि सफा इसके बाद से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। सफा ने कहा कि मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मुझे राहुल गांधी के भाषण का अनुवाद करने का ऐसा मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि सांसद ने जब अनुवाद के लिए पूछा तो मेरे दोस्तों ने मुझे इसके लिए उकसाया। मैंने थोड़ा इंतजार किया। जब मुझे लगा कि कोई भी छात्र भाषण देने के लिए तैयार नहीं है तो मैंने इस चुनौती को स्वीकार करने का निर्णय किया।

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