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भय के माहौल से सूने होने लगे सरहदी गांव

दहशतजदा लोगों को इधर से उधर भागते देख इस सरहदी गांव की वह नन्ही बालिका रो रही थी।

Author डोके (अमृतसर) | September 30, 2016 2:34 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

दहशतजदा लोगों को इधर से उधर भागते देख इस सरहदी गांव की वह नन्ही बालिका रो रही थी। उसके माता-पिता मजदूरी के लिए तरनतारन गए हुए थे। बुधवार-गुरुवार की रात आतंकवादियों के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद यहां के लोगों में भय का माहौल था। सिर्फ इसी गांव में नहीं, पाक सीमा से सटे अमृतसर, तरनतारन, पठानकोट और गुरदासपुर के सभी गांवों में। पंजाब सरकार ने भी इस कार्रवाई के बाद सीमा के गांवों को खाली करवाने का फरमान जारी किया है जिससे भय और बढ़ा है। सीमा के दो से तीन किलोमीटर क्षेत्र में बसे गांवों के लोगों में ज्यादा भय है। गुरुवार को वे अपने जरूरी सामान साथ लेकर सुरक्षित ठिकानों को भागते देखे गए। उनके चेहरों पर भय की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं। जिसके पास जो था, उसे ही लेकर भाग रहा था- स्कूटर, आटो, ट्रैक्टर, कार, बस, बाइक और जीप। डोके की महिला सरपंच अमरजीत कौर भी सुरक्षित जगह की तरफ निकल चुकी हैं।

हालांकि उनके पति ने गांव में ही रहने का फैसला किया है ताकि घर और पशुओं को देखा जा सके। दो-चार और हिम्मतवर हैं जिन्होंने गांव में ही रहने का फैसला किया है। अन्यथा चहल-पहल वाले इस गांव में मुर्दनी-सी छाई है। दरअसल पंजाब सरकार अचानक सेना की इस कार्रवाई के लिए कतई तैयार नहीं थी जिससे उसके गांव खाली करने के निर्देश लोगों में भय का कारण बन गए। ज्यादातर लोग सुरक्षित क्षेत्रों में रह रहे अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने जा चुके हैं।  सरपंच के पति सतनाम सिंह ने कहा कि सेना का कार्रवाई के बाद पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई कर सकता है लिहाजा गांव को खाली कर दिया जाए। ‘सरकार के लोगों ने बताया कि रात में यहां रहना किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं होगा। ज्यादातर गांववासी पहले ही यहां से जा चुके हैं।’ सुबह जब सरकार की तरफ से पहली चेतावनी जारी की गई, ज्यादातर लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने समझा कि कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जैसे ही गंभीरता का अहसास उन्हें हुआ उन्होंने तुरंत जरूरी सामान और कपड़े वगैरह बांधने शुरू कर दिए।

राजाताल के मुख्तियार सिंह, जो एक शिक्षक और सरपंच के पुत्र हैं, ने कहा कि लोगों में भय है और वे यहां से भाग रहे हैं। डोके के चानन सिंह ने कहा कि ऐसी विकट परिस्थिति में सरकार ने उनके जाने या हिफाजत के लिए अपनी तरफ से कुछ नहीं किया है, सिवाय गांव खाली कर देने का फरमान जारी कर देने के। लोगों ने कहा कि जिनके पास साधन हैं वे तो सुरक्षित ठिकानों को निकल गए , अन्य को काफी मुश्किलें आ रही हैं।

पैंतीस साल की सीतों पैदल ही गांव से निकलकर सुरक्षित जगह को जा रही है। ‘मेरे पास जाने के लिए ईंटों का भट्ठा ही है जहां मैं काम करती हूं।’ उसके अलावा कई हैं जो पैदल ही गांव से जा रहे थे। भैनके गांव में लोगों ने बताया कि कारगिल के समय भी ऐसी ही भय की स्थिति बनी थी। ‘तब भी रातोरात गांव खाली करने का आदेश आ गया था।

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