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केरल: रिकॉर्ड सवा लाख छात्रों ने फॉर्म में खाली छोड़ा धर्म-जा‍ति का कॉलम

केरल विधानसभा के चालू सत्र में बुधवार को इस मामले पर प्रश्नकाल के दौरान चर्चा हुई। वमनपुरम से सीपीएम विधायक डीके मुरली ने दाखिले के वक्त जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ने वाले स्कूली छात्रों की संख्या को लेकर सवाल किया।

स्कूल के बच्चे (एक्स्प्रेस आर्काइव/फाइल फोटो)

इस वक्त देश के हर हिस्से में स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। प्राइवेट हो या सरकारी हर स्कूल में बच्चों का दाखिला आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए शुरू हो गया है। केरल में भी बच्चों द्वारा नए सत्र के लिए स्कूलों में दाखिला लिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में करीब 1.24 लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने एडमिशन फॉर्म में जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ दिया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस बात का ऐलान किया है। इससे पहले भी केरल में स्कूल के बच्चों द्वारा जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ा जा चुका है, लेकिन समय के साथ ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ रही है जो अपनी जाति और धर्म को पढ़ाई के बीच में नहीं लाना चाहते हैं। केरल विधानसभा के चालू सत्र में बुधवार को इस मामले पर प्रश्नकाल के दौरान चर्चा हुई। वमनपुरम से सीपीएम विधायक डीके मुरली ने दाखिले के वक्त जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ने वाले स्कूली छात्रों की संख्या को लेकर सवाल किया।

इस सवाल के जवाब में राज्य के शिक्षा मंत्री सी रवींद्रनाथ ने बताया कि करीब 1.24 लाख बच्चों ने इस साल एडमिशन फॉर्म में जाति और धर्म के कॉलम को खाली छोड़ा है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने वाले 1,23,630 बच्चे पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा के छात्र हैं तो वहीं ग्यारवीं के 278 बच्चों ने यह कॉलम खाली छोड़ा है। वहीं ऐसा करने वाले 239 छात्र 12वीं कक्षा में पढ़ते हैं। आपको बता दें कि ये आंकड़े 2017-18 के शैक्षणिक सत्र के हैं। फिलहाल जिलों और क्षेत्रों के हिसाब से इन आंकड़ों का वर्गीकरण अभी मौजूद नहीं है, लेकिन राज्य के करीब 9000 स्कूलों से यह आंकड़े कलेक्ट किए गए हैं।

द न्यूज मिनट के मुताबिक इस मामले में दलित कार्यकर्ता सनी एम कपिकाड का कहना है, ‘उच्च जाति के बच्चे अगर अपनी जाति और धर्म नहीं बताते हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन बाकी लोगों के लिए नुकसान है। बाकी लोग संविधान द्वारा दिया जा रहा लाभ नहीं ले सकेंगे, क्योंकि इसके लिए कास्ट बताना जरूरी है। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि बच्चों के फॉर्म में जाति और धर्म का कॉलम खाली छोड़ने वाले उदारवादी हैं। केरल में लोग आसानी से पहचान जाते हैं कि कौन नायर है और कौन नंबूथिरी है। उच्च जाति के लोगों के लिए कास्ट बताना खुशी की बात होती है। यह उनकी पूंजी की तरह है।’

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