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64 वर्षों में बाढ़ के कारण एक लाख से अधिक मौतें

सरकार को चाहिए कि अंधाधुंध बांध बनाने की वर्तमान नीति पर पुनर्विचार करे। नदियों के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने पर भी जोर देना चाहिए।

Author July 30, 2018 6:20 AM
यमुना का जलस्‍तर लगातार बढ़ रहा है। (Photos : ANI)

देश में पिछले 64 वर्षों में बाढ़ के कारण 1.07 लाख लोगों की मौत हुई, आठ करोड़ से अधिक मकानों को नुकसान हुआ और 25.6 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में 109202 करोड़ रुपए मूल्य की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस अवधि में बाढ़ के कारण देश में 202474 करोड़ रुपए मूल्य की जनसुविधाओं की हानि हुई है। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी प्राप्त हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1953 से 2017 के दौरान देश के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में बाढ़ के कारण 46.60 करोड़ हेक्टेयर इलाके में 205.8 करोड़ जनसंख्या प्रभावित हुई, 8.06 करोड़ घरों को नुकसान पहुंचा, 53576 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्ति को नुकसान हुआ और 60.29 लाख पशुओं की हानि हुई। देश में पिछले 64 वर्षों के दौरान बाढ़ से प्रति वर्ष औसतन 1654 लोग मारे गए, प्रति वर्ष 92763 पशुओं का नुकसान हुआ, औसतन 71.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, प्रति वर्ष 1680 करोड़ रुपए मूल्य की फसलें बर्बाद हुईं और 12.40 लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

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मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह के अनुसार बाढ़ और सूखा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए इन दोनों का समाधान सामुदायिक जल प्रबंधन से ही संभव है। जल के अविरल प्रवाह को बनाए रखना होगा और इस काम से ही जल के सभी भंडारों को भरा रखने के साथ बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि अंधाधुंध बांध बनाने की वर्तमान नीति पर पुनर्विचार करे। नदियों के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखने पर भी जोर देना चाहिए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार (ए के पूर्व सचिव नूर मोहम्मद ने कहा कि समन्वित बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया। नदियों के किनारे स्थित गांव में बाढ़ से बचाव के उपाए नहीं किए गए।

आज भी गांव में बाढ़ से बचाव के लिए कोई व्यवस्थित तंत्र नहीं है। उन क्षेत्रों की पहचान करने की भी जरूरत है, जहां बाढ़ में गड़बड़ी की ज्यादा आशंका रहती है। आज बारिश का पानी सीधे नदियों में पहुंच जाता है। वाटर हार्वेसटिंग की सुनियोजित व्यवस्था नहीं है ताकि बारिश का पानी जमीन में जा सके। शहरी इलाकों में नाले बंद हो गए हैं और इमारतें बन गई हैं। ऐसे में थोड़ी बारिश में शहरों में जल जमाव हो जाता है। अनेक स्थानों पर बाढ़ का कारण मानवीय हस्तक्षेप है। साल 1977 में सबसे अधिक 11316 मानव जीवन की हानि हुई। इस वर्ष 5.5 लाख पशुओं की हानि हुई। वहीं,1953 से 2012 के बीच बाढ़ के कारण आंध्र प्रदेश में हर साल औसतन 348 लोग मारे गए व 5.1 लाख हेक्टेयर इलाका प्रभावित हुआ।

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