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राजपाट: दांवपेच

कांग्रेस ने गैरसैण को राजधानी बनाने का फैसला किया था। यह बात अलग है कि दो दशक बाद भी राजधानी देहरादून में ही कायम है। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है।

Author Published on: March 7, 2020 2:03 AM
गैरसैण में उत्तराखंड की नई विधानसभा (फोटो – इंडियन एक्सप्रेस)

सूबा बेशक छोटा है पर उठापटक में कोई कमी नहीं। उत्तराखंड में लोकसभा की महज पांच सीटें हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह सक्रिय भी केवल दो ही पार्टियां भाजपा और कांग्रेस हैं। कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों को मिलाकर बना है यह पर्वतीय राज्य। फिलहाल राजधानी देहरादून यानी गढ़वाल में है और हाई कोर्ट नैनीताल यानी कुमाऊं में। भौगोलिक नजरिए से देखें तो देहरादून कुमाऊं वासियों को ही नहीं गढ़वाल के भी दूर-दराज पर्वतीय इलाकों के लोगों के लिए काफी दूर है। राजधानी कहीं मध्य में हो, इसी सोच से कांग्रेस ने गैरसैण को राजधानी बनाने का फैसला किया था। यह बात अलग है कि दो दशक बाद भी राजधानी देहरादून में ही कायम है। अब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है।

कांग्रेस इसे स्थाई राजधानी बनाने की पक्षधर रही है। मुख्यमंत्री की ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा पर सूबे के भाजपाई जश्न मना रहे हैं। यह बात अलग है कि कांग्रेस की सरकार में जब विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गैरसैण में तंबू लगवा कर विधानसभा का एक सत्र भी आयोजित कर दिया था। यह सिलसिला तो हरीश रावत के राज में भी बना रहा पर वे गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने से बचते दिखे। त्रिवेंद्र सिंह के फैसले की आलोचना करने वालों की भी कमी नहीं है। खासकर दूर-दराज पर्वतीय इलाकों में रहने वालों को यह नागवार गुजरा है। पर मैदानी क्षेत्र में खुशी की लहर है। स्थाई राजधानी बनती तो मैदानी इलाके के लोगों को असुविधा होती।

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