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राजपाट-धमक में इजाफा

हरक सिंह रावत ने तो बागी तेवर दिखाने की भी कोशिश की। पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी कार्यशैली को बदलने से दो टूक इनकार कर दिया।
Author July 31, 2017 03:40 am
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (PTI Photo)

चूक गए लालू
लालू प्रसाद को यह जरूर अखरता होगा कि उनके पास अच्छे सलाहकार नहीं हैं। हालांकि वे किसी की सुनते भी तो नहीं हैं। नीतीश कुमार के सामने ऐसी स्थिति पैदा कर सकते थे कि वे छिटक नहीं सकते थे। लालू केवल इतना कर देते कि अपनी पार्टी को सरकार से बाहर कर लेते और बाहर से ही उनकी पार्टी नीतीश कुमार का समर्थन करती। महागठबंधन बना रहता और नीतीश कुमार भी मुख्यमंत्री के रूप में शोभा बढ़ाते रहते। बाहर रह कर भी लालू वही कर सकते थे, जो सरकार में रह कर करते रहे हैं। उनकी पार्टी के सत्ता से बाहर रहने पर उनकी छवि में निखार ही आता। उलटे नीतीश कुमार पर भी पहले से ज्यादा दबाव रहता। सबसे बड़ी बात तो यह होती कि वे जिस पार्टी को सूबे की सत्ता से बाहर रखना चाहते थे, वह सत्ता में नहीं आ पाती। आगे के लिए भी उसके सामने कठिन स्थिति बनी रहती। लेकिन लालू तो चूक गए।

धमक में इजाफा
आलाकमान का वरदहस्त हो तो असंतोष पनप ही नहीं पाता। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए यह वरदहस्त ही उनकी ताकत बन गया है। कांग्रेस से पाला बदल कर चुनाव से पहले भाजपा में आए नेता ही नहीं, कुछ भाजपाई भी शुरू में मुख्यमंत्री पर हावी होने की कोशिश करते दिखे थे। हरक सिंह रावत ने तो बागी तेवर दिखाने की भी कोशिश की। पर त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी कार्यशैली को बदलने से दो टूक इनकार कर दिया। अब तो पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी मिल गई उन्हें शाबासी। पार्टी के महामंत्री संगठन रामलाल और सूबे के प्रभारी श्याम जाजू की मौजूदगी में कार्यसमिति की बैठक मुख्यमंत्री के स्तुति गान के साथ ही निपटी। पार्टी के सूबेदार अजय भट्ट के साथ त्रिवेंद्र सिंह की पटरी अच्छी बैठ रही है। नतीजतन संगठन में असंतोष का सवाल ही नहीं उठता। उलटे संगठन का पूरा समर्थन मिल रहा है। कार्यसमिति ने तो उलटे प्रस्ताव पारित कर आमराय से दोहराया कि रावत को सरकार चलाने में और छूट दी जाए।

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