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संकटमोचक बाबा

बाबा आखिर खुलकर लालू के साथ आ ही गए। बाबा यानी शिवानंद तिवारी।
Author August 28, 2017 05:37 am
नीतीश कुमार के साथ शिवानंद तिवारी ।

बाबा आखिर खुलकर लालू के साथ आ ही गए। बाबा यानी शिवानंद तिवारी। बिहार की सियासत में कोई उनसे अनजान नहीं। बाबा के रूप में लालू प्रसाद को अच्छा सलाहकार और प्रवक्ता मिल गया है। बाबा कभी नीतीश के साथ थे। फिर लालू प्रसाद के साथ हो गए। लालू को छोड़ वापस नीतीश के पास चले गए। अब फिर उसी क्रम को दोहराते हुए लालू की शरण में आ गए हैं। लेकिन उनके पुत्र तो पहले से ही लालू के साथ हैं। बाबा की अपनी खूबी ठहरी। वे जब भी किसी का पक्ष लेते हैं तो सोच-समझ कर और व्यापक अध्ययन के बाद।

इसी तरह विरोध करने से पहले ही खासा होमवर्क करते हैं। तथ्यों और जानकारियों का तो उनके पास पुलिंदा रहता है। वे उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का प्रतिवाद कर सकते हैं। दरअसल सुशील मोदी ही तो लालू और उनके परिवार के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। मोदी को ठंडा करने की कूव्वत बाबा में ही है। लालू को भी उन पर भरोसा है। तभी तो पिछली बार पत्नी राबड़ी के मना करने के बावजूद लालू ने बाबा को साथ लिया था। पत्रकारों से भी बाबा की खूब छनती है, जानकारियों का खजाना जो रखते हैं। बुढ़ापे में भी खूब पढ़ते-लिखते हैं। अशोक सेकसरिया और किशन पटनायक सरीखे खांटी और पढ़ाकू समाजवादियों की संगत में रहने का यह असर है। पर दूसरी पारी में वे लालू प्रसाद का कितना भला कर पाएंगे, अभी से कह पाना मुश्किल है।

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