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आस्तीन के सांप

कांग्रेस के साथ हुए अखिलेश के गठबंधन को भी कहां पचा पाए थे। अब तो खुली धमकी दी है कि अखिलेश ने बसपा से हाथ मिलाया तो वे अलग पार्टी बना सकते हैं

Author August 28, 2017 5:37 AM
शिवपाल सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव। फाइल फोटो

 

समाजवादी पार्टी में बिखराव अभी थमा नहीं है। पार्टी के पांच विधान परिषद सदस्य इस्तीफे देकर भाजपा में चले गए तो हर कोई हैरान रह गया। मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव की चुप्पी ने निहितार्थ समझने में मदद की। जो पार्टी से जुदा हुए वे नेताजी के अपमान की दुहाई का बहाना बनाते दिखे। पुत्रमोह के बावजूद मुलायम को सपा का बसपा से हाथ मिलाना पसंद नहीं है। वे तो कांग्रेस के साथ हुए अखिलेश के गठबंधन को भी कहां पचा पाए थे। अब तो खुली धमकी दी है कि अखिलेश ने बसपा से हाथ मिलाया तो वे अलग पार्टी बना सकते हैं। मुलायम-शिवपाल की जोड़ी पर भाजपा के हाथों में खेलने के आरोप लगाने से पहले अखिलेश खेमा भूल जाता है कि अखिलेश की लुटिया डुबोने में उनकी गणेश परिक्रमा करने वाले कुछ चाटुकार नेताओं की भूमिका भी कम नहीं। मुलायम सिंह ने तो बेटे को दो साल पहले ही ऐसे चाटुकार नेताओं से चौकस रहने की नसीहत दी थी। पर वे संभले ही नहीं।

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मेरठ के अतुल प्रधान का तो शिवपाल यादव ने बाकायदा नाम भी लिया था और सरधना सीट से उनका विधानसभा टिकट भी काट दिया था। पर अतुल प्रधान ठहरे अखिलेश की आंखों के तारे। गुर्जर बिरादरी में तो कोई खास जनाधार है ही नहीं, पार्टी के प्रति भी कभी वफादार नहीं रहे। पिछले दिनों मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में तो उनकी पत्नी ने भी भाजपा के उम्मीदवार कुलविंदर को वोट देने की बात खुलेआम स्वीकार की। अपने असर वाले और भी वोट अतुल प्रधान ने भाजपा को दिलाए। इस चुनाव ने भाजपा के स्थानीय विधायकों के अंतरविरोध को भी उजागर कर दिया। सरधना के विवादास्पद भाजपा विधायक संगीत सोम अपनी राह चले और पार्टी को ठेंगा दिखा दिया।

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