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नीतीश कुमार- जब से गद्दी संभाली है, क्या करें- क्या न करें की मनस्थिति नहीं छोड़ रही है पीछा

नीकु बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर नया कीर्तिमान बनाने की राह पर हैं। हालांकि कुछ भी नया करने की अपनी मंशा को वे पहले से जाहिर नहीं करते।

Author June 12, 2017 4:58 AM
बिहार के सीएम नीतीश कुमार।

गंवाए धोतीवाला पाए टोपीवाला

चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी मनाई जा रही है इन दिनों बिहार में। गांधीजी के नाम पर खूब आयोजन हो रहे हैं। बापू के नाम या विचारधारा की दुहाई देने वाले तमाम संगठन सरकार की मदद के लिए आगे आए हैं। नीकु सरकार ने भी उन्हें खुल कर तवज्जो दी है। दिल्ली से भी नामी गिरामी हस्तियां बिहार का दौरा कर सरकारी आयोजनों की शोभा बढ़ा रही हैं। यह तथ्य है कि गांधी को पहली बार राज कुमार शुक्ल (शुकुलजी) बिहार लाए थे। पर उनके नाम का जिक्र शुरुआती एक-दो कार्यक्रमों में ही हुआ। उसके बाद कोई नहीं दिखा, उनका नाम लेने वाला। हालांकि उनके परिवार के लोग मौजूद हैं। सरकार भूल गई कि एकाध आयोजन में उन्हें भी बुलवा लेती।

यह परिवार तो गजब की उपेक्षा झेल रहा है। शुकुलजी के नाम पर स्कूल खोलने के लिए अपनी जमीन थी, पर इस स्कूल से भी उनका कोई सरोकार नहीं। यह तो शुकुलजी के साथ धोखाधड़ी कहलाएगी। उनके परिवार के लोग दुखी होकर भटक रहे हैं। लेकिन कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं। बेचारे इतनी ख्वाहिश भर पाल रहे हैं कि कम से कम उनको भी तो याद कीजिए जो गांधी को बिहार लाए थे। पर जमाना कितना मतलबी है। सब गवाए तो धोतीवाला पर सब पा जाए टोपीवाला।

दुविधा में नीकु

नीकु बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर नया कीर्तिमान बनाने की राह पर हैं। हालांकि कुछ भी नया करने की अपनी मंशा को वे पहले से जाहिर नहीं करते। जब कीर्तिमान बन जाता है तभी करते हैं उसका जिक्र। इस बार मुख्यमंत्री बने तो जरूर हैं पर दुविधा और द्वंद्व से मुक्त नहीं हो पाए। इसीलिए न सच को सच कह पा रहे हैं और न झूठ को झूठ। उनके मंत्रिमंडल में दो सगे भाई मंत्री हैं। दोनों नौजवान हैं। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीत गए। आखिर उनके माता-पिता दोनों ही कद्दावर नेता ठहरे। सियासत तो विरासत में मिली है दोनों को। मुश्किल यह है कि पिता चुनाव आयोग की बंदिश के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ सकते। फिर भी रुतबा कम नहीं है। मंत्री भ्राताओं के दो मामा भी विधायक रहे हैं।

बहन भी राज्यसभा की सदस्य है। ऐसे में विरोधियों को ये दोनों नौजवान कैसे सुहा सकते हैं। सो, उनकी जन्मपत्री खंगालना स्वाभाविक ठहरा। चुनाव आयोग के पास जमा हलफनामे में चूक हो गई। छोटे भाई की उम्र बड़े से ज्यादा दर्ज हो गई। पत्रकारों को नीकु की प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर जरूरी लगी होगी। आखिर दोनों को राज्यपाल ने शपथ तो नीकु की सिफारिश पर ही दिलाई थी। नीकु ने साफ जवाब देने के बजाए टालू मिक्सचर पिला दिया। बोले- आरोप लगाने वाले जानें या वे जिन पर आरोप हैं। बड़ी बेबसी में हैं नीकु। जब से गद्दी संभाली है, क्या करें- क्या न करें की मनस्थिति पीछा ही नहीं छोड़ रही। संगत से सब होत है, संगत से सब जात।

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