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राजपाट- सियासी हथकंडे

अपने विरोधी को चित्त करने के लिए भाई लोग कोई भी हथकंडा अपनाने से नहीं चूकते। अपने दुख के बजाय विरोधी के सुख से उड़ती है नींद।

Author August 28, 2017 05:58 am
उत्तराखंड सीएम की शपथ लेते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत। (Photo Source: ANI)

सियासी हथकंडे
सियासत भी कुश्ती की तरह दांव-पेच का खेल ठहरा। अपने विरोधी को चित्त करने के लिए भाई लोग कोई भी हथकंडा अपनाने से नहीं चूकते। अपने दुख के बजाय विरोधी के सुख से उड़ती है नींद। उत्तराखंड में यों त्रिवेंद्र सिंह रावत की सत्ता को पार्टी के भीतर से अभी तो कोई चुनौती देता नजर नहीं आ रहा पर मुख्यमंत्री के नाते शतरंज की बिसात तो उन्हें बिछानी ही पड़Þ रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा के बीच रावत ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा के पास हैं पर केंद्र में मंत्री एक भी नहीं। इसी उपेक्षा के नाते रमेश पोखरियाल निशंक लगे हैं लाबिंग में कि शायद उनके प्रति मोदी का दिल पसीज जाए। भगत सिंह कोश्यारी तो उम्रदराज होने की वजह से मोदी की कसौटी पर खरे उतरेंगे नहीं।

लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत की चली तो निशंक को इस बार भी निराशा ही हाथ लगेगी। इससे पहले अपने संभावित प्रतिद्वंद्वियों सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत को भी औकात बता चुके हैं मुख्यमंत्री। हरक सिंह रावत ने वन मंत्री के नाते अफसरों की तबादला सूची मुख्यमंत्री को भेजी तो वह लटक गई। अपने सचिवालय को त्रिवेंद्र सिंह रावत यानी टीएसआर ने अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के हवाले कर रखा है। कड़क मिजाज और ईमानदार आइएएस के नाते ओमप्रकाश की छवि उत्तराखंड में किसी से छिपी नहीं है। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि ओमप्रकाश के पास हरक सिंह रावत, निशंक और सतपाल महाराज सभी की पुरानी कुंडलियां हैं जिनका डर दिखा कर टीएसआर बेखटके अपने ही अंदाज में चला रहे हैं अपनी सरकार।

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