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शिवराज चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटा सकता है भाजपा नेतृत्व

अगले साल सूबे में विधानसभा चुनाव होंगे। शिवराज अगर जीत गए तो यह उनकी हैट्रिक होगी।

Author June 12, 2017 05:12 am
मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इसी फोटो पर लोग चुटीली टिप्‍पणियां कर रहे हैं। (Source: Twitter)

चला चली की बेला

मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन को कौन हवा दे रहा है? भाजपा नेताओं पर भरोसा करें तो इसके पीछे कांग्रेस का हाथ है। कांग्रेस की एक महिला विधायक ने नाराज किसानों को भड़काया, इसकी वीडियो फुटेज प्रचारित की जा रही है। पर क्या एक विधायक की इतनी ताकत हो सकती है कि वह इतना बड़ा और उग्र आंदोलन खड़ा कर दे। हकीकत तो यही है कि इस आंदोलन के असली सूत्रधार तो लंबे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे शिव कुमार शर्मा हैं। संघी उन्हें कक्काजी के नाम से जानते हैं। 2012 से ही वे शिवराज चौहान सरकार के खिलाफ मुखर हैं। इसीलिए चौहान ने उन्हें आरएसएस से बाहर करा दिया था। मंदसौर में किसानों पर हुई फायरिंग से सारे देश में भाजपा के खिलाफ संदेश गया है। उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने खुद किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था। अभी तक यह वादा पूरा नहीं हो पाया है। पर बाकी राज्यों में इसने अभावग्रस्त किसानों को कर्जमाफी की मांग के लिए उकसा दिया। इस मायने में तो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान आंदोलन की दोषी खुद भाजपा ही हुई न। बहरहाल उलटा असर अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की लोकप्रियता पर दिखने लगा है। मोदी सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया अचानक मुखर और सक्रिय हुआ है। अच्छे दिनों से लेकर बेरोजगारी, घटती विकास दर और किसानों की बेहाली जैसे सवाल उठ रहे हंै।

ऐसे में राजधानी के सियासी गलियारों में नई हवा चली है कि शिवराज चौहान को भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री पद से हटा सकता है। बहाना भले किसानों की नाराजगी बने पर असलियत कुछ और मानी जा रही है। अगले साल सूबे में विधानसभा चुनाव होंगे। शिवराज अगर जीत गए तो यह उनकी हैट्रिक होगी। इसके बाद वे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री पद की दावेदारी कर सकते हैं। खुद लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि नरेंद्र मोदी की तरह ही चौहान भी प्रधानमंत्री पद के लिए एकदम उपयुक्त हैं। यों भी व्यापं घोटाले के वक्त तो चौहान बच गए थे। इस खेल के पीछे भाई लोग गौतम अडाणी की भूमिका खंगाल रहे हैं। जिनके कमलनाथ के साथ भी बेहद मधुर रिश्ते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तो उनके नजदीकी रिश्तों और उसका फायदा मिलने का आरोप राहुल गांधी लगातार लगाते ही रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व मध्य प्रदेश को लेकर उलझन में है। वहां से दिग्विजय सिंह को दरकिनार कर ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ में से किसी एक को बढ़ाने की मांग आ रही है। पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त फंड की भी किल्लत है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ खुद कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के लिए लाबिंग कर रहे हैं। वे चुनाव का करोड़ों का खर्च भी अकेले उठा सकते हैं। यों भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी किसी तीसरे को भाजपा में उभरते नहीं देखने के लिए जानी ही जाती है। इससे पहले बड़ी तरकीब से रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर को दिल्ली से वापस गोवा भेज दिया गया जबकि रक्षा मंत्री के नाते वे बेदाग और बेबाक छवि के साथ उभर रहे थे। रक्षामंत्री के नाते उन्होंने निजी कंपनियों से खरीदारी करने से भी साफ इनकार कर दिया था।
बेअसर उपवास
शिवराज चौहान ने किसान आंदोलन की समाप्ति के लिए शनिवार को भोपाल में उपवास का अच्छा उपक्रम किया। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने उन्हें धरने पर बैठाया था। पर उसका ज्यादा असर होता नहीं दिखा। खुद को फंसा देख चौहान ने दूसरे ही दिन रविवार को रास्ता निकाला। हालांकि दावा यही था कि शांति बहाली तक वे उपवास करेंगे। दूसरे नेताओं ने कैलाश जोशी से आग्रह कर दिया कि वे आकर चौहान का उपवास खत्म कराएं। क्योंकि किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है और मंदसौर से कर्फ्यू भी उठ गया है। यह बात अलग है कि सूबे में शांति अभी भी नहीं हो पाई है। इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से साफ कहा कि सरकारी योजनाओं का फायदा सूबे में पैसे दिए बिना नहीं मिलता। अलबत्ता रविवार को भोपाल में विजयवर्गीय ने सफाई दी कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। पाठकों को बता दें कि कैलाश विजयवर्गीय हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की आंखों के तारे बने हैं। उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी कम से कम उनके समर्थक तो कब से मानते आ रहे हैं।

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