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अपनी ढपली

बिहार के मुख्यमंत्री जब भी उठाते हैं ऐसा ही चौंकाने वाला कदम उठाते हैं कि विरोधी ही नहीं अपने भी उलझन में पड़ जाएं।
Author June 26, 2017 03:37 am
नीतीश कुमार ने की नरेंद्र मोदी की तारीफ

नीकु ने फिर सबको हैरान कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री जब भी उठाते हैं ऐसा ही चौंकाने वाला कदम उठाते हैं कि विरोधी ही नहीं अपने भी उलझन में पड़ जाएं। राजग की तरफ से जैसे ही बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर घोषित हुआ, नीकु ने उनसे मुलाकात करने में देर नहीं लगाई। राजभवन गए, बधाई दी और हो सकता है कि अपने समर्थन का भरोसा भी तभी दे आए हों। हालांकि बाद में तो उन्होंने समर्थन का एलान सार्वजनिक रूप से भी कर दिया। भाजपा विरोधी माने जाते हैं यों नीकु।

पर राष्ट्रपति के मामले में उन्होंने गैर राजग दलों के रुख का इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। ये पार्टियां भाजपा के खिलाफ अपनी रणनीति तय करने की प्रक्रिया में ही थी कि नीकु ने अपने अलगाव का संकेत दे दिया। उनके समर्थकों ने सफाई दी कि राज्यपाल के नाते कोविंद ने नीकु को हमेशा सहयोग दिया। फिर वे पढ़े-लिखे और अनुभवी दलित नेता ठहरे। तो क्या नीकु ने कोविंद का समर्थन यह सोच कर किया है कि इससे बिहार के दलितों में उनकी पैठ बढ़ेगी। भाजपाई इसका मतलब नीकु का अपनी तरफ झुकाव मान रहे हैं। लेकिन विरोधी दलों ने भी तो एक दलित महिला को अपना उम्मीदवार बना दिया।

मीरा कुमार न केवल लोकसभा अध्यक्ष रह चुकी हैं बल्कि दलितों के कद्दावर नेता रहे बाबू जगजीवन राम की बेटी भी हैं। ऐसे में बिहार के दलित का विरोध करके कैसे नीकु दलितों में अपनी पैठ बढ़ाने की खुशफहमी पाल रहे हैं। मीरा कुमार का समर्थन नहीं करना तो बिहार के दलितों को अखर सकता है। नीकु के बड़े भाई लालू यादव ने फरमाया है कि वे नीकु से अपने फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह करेंगे। लेकिन नीकु की पार्टी के नेता केसी त्यागी ने साफ कहा है कि पार्टी के फैसले पर पुनर्विचार का प्रश्न ही नहीं उठता। जो भी हो नीकु भी तो खुद को उलझन में पा रहे होंगे।

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