ताज़ा खबर
 

वक्त का फेर

उत्तराखंड के कांग्रेसी नेता हरीश रावत आजकल वक्त की मार झेल रहे हैं। सत्ता से तो बेदखल हुए ही, पार्टी में भी हाशिए पर पहुंचा दिए गए।

Author Published on: July 3, 2017 3:21 AM
हरीश रावत। (फाइल फोटो)

वक्त का फेर

वक्त कभी सदैव किसी के लिए भी एक सा नहीं रहता। उत्तराखंड के कांग्रेसी नेता हरीश रावत आजकल वक्त की मार झेल रहे हैं। सत्ता से तो बेदखल हुए ही, पार्टी में भी हाशिए पर पहुंचा दिए गए। वक्त ने साथ नहीं दिया तभी तो मुख्यमंत्री रहते दो-दो सीटों से चुनाव लड़ कर भी विधानसभा नहीं पहुंच पाए। आजकल सियासी वजूद बचाने के लाले पड़े हैं। कभी हरिद्वार में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ किसानों की मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं तो कभी अपनी ताकत का आकलन करने के लिए अपने घर पर आम की दावत जैसे आयोजन कर रहे हैं। पर सारी कोशिशें अभी तक तो नाकाम ही रही हैं। इंदिरा हृदेश और किशोर उपाध्याय भी अब उनके बुलावे पर नहीं पहुंचते। जीएसटी को लेकर बेचारे पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़े उत्साह से प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। लेकिन पार्टी का एक भी नेता नहीं पहुंचा। सूबेदार प्रीतम सिंह तो खैर पहले से ही दूरी बनाए हैं। हार को लेकर हरीश रावत की छटपटाहट न जाने कब दूर होगी।

विरोधाभास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को राष्ट्रीय पर्व के रूप में क्यों मनाया, भाजपाइयों को छोड़ शायद ही कोई इसका औचित्य साबित कर पाए। सही है कि सरकार को विकास के लिए पैसा चाहिए और उसके लिए कर वसूली ही सबसे आसान तरीका है। लेकिन कौन नहीं जानता कि टैक्स किसी भी तरह का क्यों न हो, जनता के हित में कभी नहीं कहलाता। जनता पर तो टैक्स की मार ही पड़ती है। ऊपर से जीएसटी की दरें भी खासी ऊंची रख दी। उलटबासी अलग। मसलन, कोचिंग संस्थानों और दुर्घटना रोकने में सहायक हेलमेट पर 18 फीसद की ऊंची जीएसटी दर हर किसी को अखरी है। दो पहिया वाहन रईस तो चलाते नहीं हैं। इसी तरह कोचिंग संस्थान भी शिक्षा यानी ज्ञान बढ़ाने में सहायक हैं। बेहतर होता अगर सरकार ज्यादा कमाई करने वालों से ज्यादा आयकर वसूलती। जीएसटी तो आम आदमी से वसूला जाएगा। फिर कैसे इसे गरीब के हित में प्रचारित कर दिया सरकार ने।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 शासक नहीं सेवक
2 लड्डू दोनों हाथ
3 त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के पहले सौ दिन