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सांप छछूंदर सरीखी हो गई है अब नीतीश कुमार की हालत

लोगों का तो यही जताने का प्रयास रहा है कि न तो वे भ्रष्टाचार के आरोपियों की संगत पंसद करते हैं और न उन्हें मुंह लगाते हैं। अपनी बेदाग छवि पर कोई खरोंच भी नहीं आने देना रही है उनकी कोशिश।

Author July 24, 2017 5:40 AM
बिहार के सीएम नीतीश कुमार।

यक्ष प्रश्न
सांप छछूंदर सरीखी हो गई है अब नीतीश कुमार की हालत। जबकि खुद को सियासी दांव-पेंच का माहिर मानते रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री। लोगों का तो यही जताने का प्रयास रहा है कि न तो वे भ्रष्टाचार के आरोपियों की संगत पंसद करते हैं और न उन्हें मुंह लगाते हैं। अपनी बेदाग छवि पर कोई खरोंच भी नहीं आने देना रही है उनकी कोशिश। जब भी किसी करीबी पर उंगली उठी तो नीतीश ने उससे दूरी बनाने में कतई देर नहीं लगाई। लेकिन भतीजे ने संकट में डाल दिया है। भतीजा यानि बड़े भाई लालू प्रसाद का छोटा लाडला तेजस्वी। नीतीश की सरकार में वैसे तो लालू के दोनों बेटे मंत्री हैं। पर छोटे तेजस्वी की हैसियत तो उप मुख्यमंत्री के नाते दूसरे नंबर की है। तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआइ ने मामला दर्ज किया है। इसी वजह से उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है। चाहते तो खुद नीतीश भी ऐसा ही हैं। पर तेजस्वी अभी राजी नहीं हो रहे। एक तो पिता की सलाह ऊपर से पूरी पार्टी का उनको समर्थन। सो तेजस्वी ने इस्तीफा देने से यह कहकर इनकार किया है कि पार्टी ने बनाया है, पार्टी के कहने पर ही छोड़ेंगे पद। बिहार में वैसे भी नीतीश की पार्टी से ज्यादा विधायक लालू की पार्टी राजद के ठहरे। मुख्यमंत्री के नाते नीतीश चाहें तो तेजस्वी को बर्खास्त कर सकते हैं।

पर डर रहे हैं। कहीं बर्खास्त तेजस्वी को बिहार की जनता शहीद मानकर और ताकतवर न बना दे। लेकिन चुप रहने पर भी तो छवि पर उंगली उठने का जोखिम हैै। बेचारे बुरे फंस गए। जनता और मीडिया दोनों का ही सामना करने से बच रहे हैं। लेकिन यह स्थिति कब तक चलेगी। तेजस्वी पर आरोप होते हुए भी उतना संकट नहीं है जितना बेदाग छवि वाले और खुद को उसूलों का पाबंद बताने वाले नीतीश पर मंडरा रहा है। दरअसल लालू और नीतीश के बीच पड़ी गांठ को खोलने का काम अब कांग्रेस कर रही है। बिहार की गठबंधन सरकार में वह भी तो हिस्सेदार ठहरी। तभी तो शनिवार को नीतीश ने दिल्ली आकर राहुल गांधी से मुलाकात की। खुद तो मीडिया से न राहुल ने कुछ कहा और न नीतीश ने। पर करीबियों से छनकर सामने आई जानकारी से यही खुलासा हुआ कि नीतीश अपनी छवि को बेदाग रखने के लिए तेजस्वी का इस्तीफा चाहते हैं। अब तो यक्ष प्रश्न यही है कि राहुल गांधी इसके लिए लालू यादव को रजामंद कर पाएंगे या नहीं।

प्रतिबद्धता बेमिसाल
बाबा भी रघुवंश बाबू जैसे ही हैं। बाबा का मतलब हर बिहारी बखूबी समझ जाता है। शिवानंद तिवारी का प्रचलित नाम यही है। वे खांटी समाजवादी रामानंद तिवारी के पुत्र ठहरे। जिसके साथ रहते हैं, पूरे समर्पण और निष्ठा से रहते हैं। कभी नीतीश उन्हें भाते थे। अब लालू उनके पसंदीदा बन गए हैं। फिर कुछ बोल दिया और विरोधी आग बबूला हो उठे। नीतीश का साथ यों ही नहीं छोड़ा। उन्होंने दोबारा राज्यसभा भेजने लायक नहीं माना तो जनता दल (एकी) में रहकर वे करते भी क्या। इन दिनों लालू यादव और उनका परिवार संकट से घिरा है। लिहाजा बाबा खुलकर साथ दे रहे हैं। तेजस्वी से इस्तीफा मांगने वालों की जमकर लानत मलानत कर रहे हैं। नीतीश को भी नहीं छोड़ा। उन्हें सत्ता का लोभी तक कह डाला। ऊपर से यह सवाल अलग दाग दिया कि नीतीश के इर्द-गिर्द रहने वाले सारे नेता क्या दूध के धुले हैं? नीतीश का अपना तरीका ठहरा।

एक तो किसी की बात का कभी जल्दबाजी में जवाब नहीं देते। ऊपर से जिसे अपने स्तर का नहीं समझते, उसकी बात की तो परवाह भी नहीं करते। उन्हें लगता है कि ऐसे आदमी का जवाब देने से उसका कद बढ़ेगा। पर यही सोच उनकी पार्टी के बाकी नेताओं की क्यों हो। वे तो नीतीश पर हमला करने वालों पर झपट पड़ते हैं। बाबा की भी बखिया उधेड़ रहे हैं। पर बाबा तो बाबा ठहरे। पहले ही ऐलान कर दिया था कि न तो वे अब विधानसभा में जाएंगे और न संसद का रुख करेंगे। पर किसी का विरोध या समर्थन करने से कतई संन्यास नहीं लिया है उन्होंने। खास बात यह है कि उनके कहे का असर भी होता है। तभी तो बाबा कहलाते हैं।

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