ताज़ा खबर
 

राजपाटः तंज खिसियाहट में

शिवराज ने सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत को खाद्य एवं आपूर्ति और सहकारिता विभाग दिए हैं जबकि दलित नेता तुलसी सिलावट को जल संसाधन। कमलनाथ सरकार में सिलावट स्वास्थ्यमंत्री थे तो राजपूत के पास राजस्व और परिवहन जैसे अहम विभाग थे। भाजपा नेता नरोत्तम मिश्र गृह और स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग पा गए।

shivraj singh chauhan cabinet, Madhya Pradesh Cabinet, शिवराज सिंह कैबिनेट, तुलसी सिलावत, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, गोविंद राजपूत, tulsi silawat,सीएम शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया। (फाइल)

लगातार 28 दिन तक एक सदस्यीय मंत्रिमंडल का नया कीर्तीमान कायम करने के बाद 21 अप्रैल को पूर्णबंदी में ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने सीमित ही सही पर अपनी कैबिनेट का गठन कर लिया। वे इकलौते बेशक सरकार तो चला रहे थे पर कैबिनेट की बैठक नहीं कर सकते थे। जिसके लिए मुख्यमंत्री के अलावा न्यूनतम एक सहयोगी मंत्री तो जरूरी होता है। सरकार के अहम फैसले कैबिनेट ही ले सकती है, अकेले मुख्यमंत्री नहीं। विलंब की जाहिर वजह तो कोरोना के संक्रमण से जारी पूर्णबंदी बताई जा रही थी पर हकीकत यह है कि मंत्रियों का चयन झंझट का काम था। खासकर कमलनाथ सरकार से इस्तीफा देने वाले मंत्रियों और कांग्रेस के इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों के समायोजन का मुद्दा बाधा बना था। सूबे में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो मुख्यमंत्री की आलोचना भी हुई कि कैबिनेट का गठन नहीं कर पा रहे। शुरू में उम्मीद थी कि 14 अप्रैल को पूर्णबंदी हट जाएगी और विस्तार कर लिया जाएगा। तब तक मंत्रियों का चयन भी कर सकेंगे। पर पूर्णबंदी बढ़ गई तो 21 अप्रैल को पांच मंत्रियों को शपथ दिला ही दी। दो ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक और तीन भाजपाई। इस चक्कर में बेचारे ज्योतिरादित्य सिंधिया को गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की परिक्रमा भी करनी पड़ी।

वे तो इसी कोशिश में रहे होंगे कि कमलनाथ सरकार से इस्तीफा देने वाले सभी मंत्रियों को मौका मिले। हो सकता है कि उपमुख्यमंत्री का पद भी मांगा हो। पर अगले विस्तार तक उन्हें इंतजार करना ही होगा। नए-नए भाजपा में आए हैं, सो तेवर भी नहीं बदल सकते इतनी जल्दी। हां, कांग्रेस को तंज करने का मौका जरूर मिल गया। खासकर विभागों के बंटवारे को लेकर। अपनी सरकार गंवा चुके कांग्रेसी चिढ़े तो हैं ही बागी नेताओं से। तभी तो प्रदेश कांग्रेस ने ही ट्वीट कर दिया- उपमुख्यमंत्री का पद मिलना था, एक अच्छा विभाग तक नहीं मिल सका। राज्यसभा दूर है। विधायक रहे नहीं, मंत्री पद नाम भर को मिला। बीजेपी टिकट देगी नहीं, टिकट मिली तो जीत नामुमकिन। कुल मिलाकर श्री अंत का अंत श्री हो गया।

शिवराज ने सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत को खाद्य एवं आपूर्ति और सहकारिता विभाग दिए हैं जबकि दलित नेता तुलसी सिलावट को जल संसाधन। कमलनाथ सरकार में सिलावट स्वास्थ्यमंत्री थे तो राजपूत के पास राजस्व और परिवहन जैसे अहम विभाग थे। भाजपा नेता नरोत्तम मिश्र गृह और स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग पा गए। दूसरे भाजपाई कमल पटेल के हिस्से आए कृषि व परिवार कल्याण। आदिवासी मीणा सिंह को जनजाति मामलों तक ही सीमित कर दिया है। कांग्रेसी तो भाजपा के आठ बार के विधायक गोपाल भार्गव तक को भी नहीं छोड़ रहे। उन पर तंज कस दिया- अपमान की सुनामी देखिए। नेता प्रतिपक्ष थे। पर अपनी सरकार बनी तो राज्यमंत्री का पद भी हिस्से नहीं आया। भार्गव ही क्यों भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ला, रामपाल सिंह और ज्योतिरादित्य की बुआ यशोधरा राजे जैसे कितने ही कद्दावर भाजपा नेताओं के मंत्री न बनाए जाने पर मुंह लटक गए हैं। चौहान के लिए मंत्रियों का चयन और विभागों का बंटवारा हंसी खेल होगा भी नहीं। खुद सहित कैबिनेट में 34 ही रह सकते हैं। अब बचे 28, अपनों की अनदेखी करें या कांग्रेस छोड़कर आने वालों से वादाखिलाफी। सपा-बसपा और निर्दलियों की उपेक्षा करना भी तो जोखिम भरा हो सकता है।

सियासी चश्मा
सारी दुनिया मान रही है कि कोरोना का संक्रमण में आपसी भेदभाव भुलाकर सब इस महामारी से लड़ेंगे तभी जान बचेगी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रव्यापी पूर्णबंदी की घोषणा करते वक्त कहा था कि जान है तो जहान है। पर राजनीतिक नफे नुकसान के गुणा भाग से कोरोना भी बच नहीं पाया। राजस्थान को ही लीजिए, इस सूबे की औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा पर संकट दूसरे स्थानों के मुकाबले गहरा था। सरकारी अमले ने जनसहयोग से प्रकोप को बेकाबू नहीं होने दिया। लेकिन बयान बहादुर चुप कहां बैठते हैं। बोलने का बहाना ढंूढ़ते हैं। संयोग देखिए कि राजस्थान के ज्यादातर नामचीन शहर ही कोरोना से संक्रमित हैं। नामचीन सियासी नजरिए से। मसलन राजधानी जयपुर में मरीजों का आंकड़ा सात सौ पार कर चुका है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शहर जोधपुर में भी अब तक चार सौ मामले सामने आ चुके हैं। अजमेर से उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाता है। वहां भी हालात गंभीर हंै। उनके संसदीय क्षेत्र टोंक में भी सौ का आंकड़ा पार हो चुका है। हालत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के शहर कोटा की भी अच्छी नहीं है। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि कोरोना जाति, क्षेत्र, मजहब और वर्ग नहीं देखता। फिर भी अनेक भाजपाई संक्रमण फैलाने के लिए एक विशेष संप्रदाय के संक्रमितों को ही परोक्ष रूप से निशाना बना रहे हैं। यानी कोरोना के मुद्दे पर भी सियासी रोटियां सेंकने की मंशा दिखती है। भाजपा विधायक मदन दिलावर के खिलाफ कोटा में तो अशोक लाहोटी के खिलाफ जयपुर में पुलिस ने भड़काऊ बयान देने पर मामला दर्ज किया है। भाजपाई जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाने के मूड में हैं वहीं सत्तारूढ़ दल उन्हें सियासत न करके एकजुट होने की नसीहत दे रहा है। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने तो भाजपा को संकीर्ण मानसिकता छोड़ कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए पहल करने की अपील की है। कोरोना के हारने तक भी इंतजार करने को तैयार नहीं राजनीति के खिलाड़ी।

अमंगल की दुहाई
सनातन धर्म में चार धाम का खास महत्त्व है। ये चारों धाम उत्तराखंड राज्य की ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर स्थित हैं। बद्रीनाथ जहां विष्णु भगवान का स्थान माना जाता है वहीं केदारनाथ के शिव मंदिर की गणना बारह प्रतिष्ठित ज्योतिर्लिंग में होती है। खास तिथियों पर ही उनके कपाट खुलते और बंद होते हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों के कपाट अक्षय तृतीया को खुलते हैं। जो 26 अप्रैल को है। फिर केदारनाथ मंदिर के कपाट उसके तीन दिन बाद खोलने की परंपरा है। यानी 29 अप्रैल को खुलेंगे। बद्रीनाथ के एक दिन बाद 30 अप्रैल को। बद्रीनाथ के प्रबंधन में टिहरी राजघराने की भूमिका भी रहती है। पूर्णबंदी का कारण बता उत्तराखंड सरकार ने इस बार बद्रीनाथ के कपाट 30 अप्रैल के बजाए 15 मई से खोलने का एलान करा दिया। केदारनाथ के बारे में सूबे की सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने खुद एलान कर दिया कि15 मई को खुलेंगे यहां के कपाट भी बद्रीनाथ की तरह। पर केदारनाथ मंदिर के रावल और पंडे पुजारी अड़ गए। कहा कि कपाट परंपरा अनुसार तय तारीख 29 अप्रैल को ही खुलेंगे। उधर बद्रीनाथ की तारीख खिसकाने पर बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती बिफर उठे और टिहरी के राजा की आलोचना की। वे चाहते हैं कि बद्रीनाथ के कपाट तय तारीख को ही खुलें। अन्यथा अमंगल होगा।

(प्रस्तुति : अनिल बंसल)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 राजपाटः कोरोना का ग्रहण
2 राजपाटः वन मैन आर्मी
3 राजपाटः मिटा दी दूरी
ये पढ़ा क्या?
X