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राजपाटः एक अनार सौ बीमार

भाजपा के मामले में जहां एक अनार सौ बीमार की स्थिति है, वहीं दबाव में कांग्रेस भी कम नहीं। बस फर्क इतना है कि उसके पास बीमार तो और भी ज्यादा हैं, पर अनार एक की जगह दो हैं। भाजपा के सूबेदार की मौत के कारण पिछले दिनों राज्यसभा की एक सीट का उपचुनाव हुआ था।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

राज्यसभा की तीन सीटों का होना है राजस्थान में चुनाव। संख्याबल का हिसाब लगाएं तो सत्तारूढ़ कांग्रेस को दो और विपक्षी भाजपा को एक सीट मिलनी चाहिए। हालांकि जो सदस्य रिटायर हो रहे हैं, वे तीनों ही भाजपाई हैं। दरअसल वसुंधरा राजे के दौर में भाजपा ने तीन चौथाई से ज्यादा सीटें जीती थी। लिहाजा विपक्षी कांग्रेस को तो राज्यसभा की एक भी सीट मिलने का कोई सवाल था ही नहीं। तीन सीटें थी तभी तो बाहरी विजय गोयल को मौका मिल गया था। जो दिल्ली भाजपा के कद्दावर नेता हैं। बदले समीकरणों के हिसाब से कांग्रेस को दोनों ही सीटों का फायदा है। मुश्किल भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने है।

भाजपा के मामले में जहां एक अनार सौ बीमार की स्थिति है, वहीं दबाव में कांग्रेस भी कम नहीं। बस फर्क इतना है कि उसके पास बीमार तो और भी ज्यादा हैं, पर अनार एक की जगह दो हैं। भाजपा के सूबेदार की मौत के कारण पिछले दिनों राज्यसभा की एक सीट का उपचुनाव हुआ था। तो कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दिया था इस सीट से उच्च सदन में। संकेत मिल रहे हैं कि दो में से एक सीट पर कांग्रेस आलाकमान किसी बाहरी नेता को समायोजित करना चाहता है। सूबे के पार्टी नेता तो प्रियंका गांधी को भेजने की मनुहार कर चुके हैं। फैसले का आधार जातीय भी रहेगा ही।

जाट, दलित और ब्राह्मण तीनों ही जातियों के नेता लॉबिंग में जुटे हैं। आम तौर पर राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में मुख्यमंत्री की भूमिका अहम होती है। सो, अशोक गहलोत को खासी माथापच्ची करनी होगी। भाजपा की दुविधा और ज्यादा है। विजय गोयल जहां अपनी मौजूदा हैसियत को बनाए रखने के लिए जमकर भाग दौड़ कर रहे हैं वहीं सूबे के पार्टी नेता इकलौती सीट भी किसी बाहरी नेता को जाए, इसके पक्ष में नहीं।

गोयल के साथ जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें नारायण पंचारिया के पीछे संघ का वरदहस्त है। जबकि दूसरे राम नारायण डूडी ठहरे वसुंधरा खेमे के। वसुंधरा की अब ज्यादा चल नहीं रही सो चालाक डूडी ने भी पाला बदल लिया है। वे आलाकमान से अनुकूल फैसले की उम्मीद पाले बैठे हैं।

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