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राजपाटः खरी कहावत

कई कहावतें कालजयी हैं। मसलन, बड़े लोगों के बारे में सयाने कह गए कि अफसर के अगाड़ी और घोड़े के पिछाड़ी रहने से नुकसान ज्यादा होता है, फायदा कम।
Author February 10, 2018 03:14 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

कई कहावतें कालजयी हैं। मसलन, बड़े लोगों के बारे में सयाने कह गए कि अफसर के अगाड़ी और घोड़े के पिछाड़ी रहने से नुकसान ज्यादा होता है, फायदा कम। इसी तरह पुलिसवालों के बारे में कहावत है कि उनकी दोस्ती भी बुरी और दुश्मनी भी। आम लोगों की बात तो दूर पश्चिम बंगाल में तो आला पुलिस अफसर तक को देर से समझ आया कहावत का मतलब। वहां एक महिला पुलिस अफसर की मुख्यमंत्री से नजदीकी जगजाहिर रही है। माओवादी गतिविधि वाले जंगल महल इलाके में शामिल पश्चिम मेदिनीपुर जिले की पुलिस कप्तान थीं। मुख्यमंत्री को जंगल महल की मां कह कर बुलाती थीं। इस चक्कर में बाकी सियासी दलों की जली-कटी भी सुननी पड़ती थी। पर सत्ता का वरदहस्त रहते डर किस बात का। मुकल राय का भी खूब समर्थन था उन्हें। पर पिछले दो साल में मुकुल राय की दुर्गति हुई तो उनकी दशा भी बिगड़ने लगी। मुकुल राय के भाजपा में जाने के बाद तो मुख्यमंत्री ने किनारा ही कर लिया अपनी मुंह लगी इस महिला अफसर से।

इसका संदेश सार्वजनिक होते ही अफसर के खिलाफ सरकार के पास शिकायतों का अंबार लग गया। जिले की सबंग विधानसभा सीट के उपचुनाव में अपनी जीत से तृणमूल कांग्रेस को उतनी तसल्ली नहीं हुई जितनी भाजपा के वोट बढ़ जाने से उसकी बेचैनी बढ़ी। नतीजतन अफसर के तबादले का फरमान जारी हो गया। अफसर ने तेवर दिखाने की गरज से वीआरएस मांगा तो जैसे सरकार की हसरत ही पूरी हो गई। वीआरएस को मंजूरी देने में देर नहीं लगाई सरकार ने। ऊपर से पिछले हफ्ते अफसर और उनके पति के पीछे पड़ गया खुफिया विभाग।

दंपत्ति के आधा दर्जन फ्लैटों की तलाशी हुई और करोड़ों रुपए बरामद भी हो गए। साफ हो गया कि मुख्यमंत्री से निकटता की आड़ में अपनी हैसियत खूब बढ़ाई थी। अदालत की शरण में पहुंचीं तो निराशा ही हाथ लगी। अलबत्ता एक अदालत ने तो आय से ज्यादा संपत्ति जुटाने के मामले में उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का ही आदेश दे दिया। कहां तो माओवादी भी कांपते थे उनके नाम से और कहां बेचारी खुद भागी-भागी फिर रही हैं पुलिस के डर से। इसी को कहते हैं कि वक्त का फेर

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