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राजपाटः मुंगेरी शरमाए

सोनेलाल पटेल ने बहुजन समाज पार्टी छोड़ने के बाद बनाई थी अपनी यह अलग पार्टी। दावा तो पिछड़ों की पार्टी होने का है। पर है यह हकीकत में केवल कुर्मियों की पार्टी। यूपी और बिहार में ओबीसी की कुर्मी जाति की तादाद खासी है।

अनुप्रिया पटेल

अनुप्रिया पटेल की अपनी मां कृष्णा पटेल और छोटी बहन से नहीं पटी तो पार्टी अपना दल दो फाड़ हो गई। अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष पटेल एक पार्टी में तो मां कृष्णा पटेल दूसरी पार्टी में। पर दोनों ही धड़ों ने नाम अपनी-अपनी पार्टी का अपना दल ही रखा है। उत्तर प्रदेश तक सीमित है इस पार्टी का असर। सोनेलाल पटेल ने बहुजन समाज पार्टी छोड़ने के बाद बनाई थी अपनी यह अलग पार्टी। दावा तो पिछड़ों की पार्टी होने का है। पर है यह हकीकत में केवल कुर्मियों की पार्टी। यूपी और बिहार में ओबीसी की कुर्मी जाति की तादाद खासी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कुर्मी ठहरे। जब तक उत्तर प्रदेश भाजपा में कल्याण सिंह की तूती बोलती थी, कुर्मियों पर भाजपा की पकड़ थी।

संतोष गंगवार, ओम प्रकाश सिंह और राम कुमार वर्मा जैसे तमाम कद्दावर नेता भाजपा में थे। पर सोनेलाल पटेल ने अपनी अलग पार्टी बनाई तो ज्यादातर कुर्मी उसी में चले गए। सोनेलाल की 2009 में दुर्घटना में मौत के बाद पार्टी की अध्यक्ष बेशक उनकी पत्नी कृष्णा पटेल बनीं लेकिन चेहरा बेटी अनुप्रिया ही रहीं। मिर्जापुर की रोहनिया सीट से 2012 में विधायक बनीं अनुप्रिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन किया। दो सीटें मिलीं और मिर्जापुर व प्रतापगढ़ दोनों ही सीटों पर पार्टी जीत गई। सबसे युवा अनुप्रिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम में राज्यमंत्री भी बनाया। फिर 2017 के यूपी विधानसभा के चुनाव में भी भाजपा से तालमेल कर अनुप्रिया की पार्टी नौ सीटें जीत गई।

योगी आदित्यनाथ ने इस पार्टी के जयकुमार सिंह (जैकी) को राज्य मंत्री भी बना दिया। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में अनुप्रिया रूठने लगीं तो भाजपा ने फिर दो सीटें देने की उनकी शर्त मान ली। इस बार वे खुद तो मिर्जापुर से ही लड़ीं और जीतीं पर प्रतापगढ़ के बजाए दूसरी सीट हिस्से आई राबर्ट्स गंज। पकौड़ीलाल कोल जीत भी गए। पर भाजपा के अपने प्रचंड बहुमत ने अनुप्रिया के इस बार कैबिनेट मंत्री बनने के सपने को तोड़ दिया। पहले जैसी राज्यमंत्री की हैसियत का प्रस्ताव मिला जो उन्होंने ठुकरा दिया। फिर भरोसा मिला कि भरपाई के लिए उनके एमएलसी पति आशीष सिंह पटेल को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री पद मिलेगा। यह भरोसा भी थोथा ही साबित हुआ।

नतीजतन दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही अपना दल के लोगों ने नखरे दिखाने शुरू कर दिए। पार्टी की सभी जिला इकाइयों ने प्रस्ताव पारित कर भाजपा राज में पिछड़ों की अनदेखी का रोना रोया और 2022 में अनुप्रिया पटेल को यूपी का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया। भाजपाई इसे मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कोई भाव नहीं दे रहे। है भी ठीक, नौ विधायकों और दो सांसदों वाली एक खास जाति की पार्टी की नेता भला मुख्यमंत्री किस फार्मूले से बनेंगी।

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