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कुर्सी का फेर

30 जून को रिटायर हो जाएंगे सूबे के मौजूदा मुख्य सचिव ओपी मीणा। एक जुलाई को इस कुर्सी को संभालने की हसरत आधा दर्जन आइएएस अफसर पाले हंै।

Author June 26, 2017 4:43 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

बड़ी बेचैनी है इन दिनों राजस्थान की नौकरशाही में। नए मुख्य सचिव की तैनाती की उत्सुकता से प्रतीक्षा है सभी को। 30 जून को रिटायर हो जाएंगे सूबे के मौजूदा मुख्य सचिव ओपी मीणा। एक जुलाई को इस कुर्सी को संभालने की हसरत आधा दर्जन आइएएस अफसर पाले हंै। अटकलें लग रही हैं कि मुख्य सचिव की तैनाती के साथ ही सूबे की नौकरशाही में बड़ा बदलाव करेंगी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के नजरिए से भी जरूरी माना जा रहा है ऐसा बदलाव। इस समय तो एजंडा सियासी मुनाफा पाना है। मीणा को यों वरिष्ठता के आधार पर मिली थी सूबे के आला अफसर की कुर्सी। तो भी भाजपा ने इस बहाने जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की थी। वसुंधरा के धुरविरोधी निर्दलीय विधायक किरोड़ीलाल मीणा के असर को कम करना भी मकसद रहा होगा। मीणा बिरादरी पर अच्छी पकड़ है किरोड़ी लाल मीणा की।

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संकेत मिल रहे हैं कि रिटायर होते ही ओपी मीणा किसी आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल तो चिंता दूसरी है कि मीणा का उत्तराधिकार किसे बनाया जाए। ज्यादातर दावेदारों के साथ जातीय पहलू दुविधाजनक है। हालांकि मुख्यमंत्री के पसंदीदा अफसरों में एनसी गोयल और डीबी गुप्ता माने जा रहे हैं। लेकिन इन दोनों को यह कुर्सी देने का मतलब होगा आधा दर्जन वरिष्ठ अफसरों की अनदेखी। अशोक शेखर, अशोक जैन, गुरज्योत कौर व राजहंस उपाध्याय आदि। महिला अफसरों को आस है कि महिला मुख्यमंत्री उनका ख्याल करेंगी और गुरज्योत कौर को बनाएंगी अगला मुख्य सचिव। ऐसा करने से महज अशोक शेखर और अशोक जैन की वरिष्ठता लांघनी पड़ेगी। पर इन दोनों की नौकरी अब बची ही छह महीने की है। हालांकि गुरज्योत कौर के रिटायर होने में अभी डेढ़ साल है। वे बनी तो अगला विधानसभा चुनाव उन्हीं के रहते हो जाएगा। चूंकि बदलाव बड़ा होने की हवा बह रही है सो बेचैनी भी नौकरशाही में इस बार ज्यादा है।

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