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राजपाट- संघी निगरानी

संगठन महामंत्री के पद पर आरएसएस अपने किसी पूर्णकालिक प्रचारक की नियुक्ति कर भाजपा की लगाम परोक्ष रूप से अपने हाथ में रखता है।
Author August 28, 2017 05:52 am
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

दीदी का पैंतरा
दार्जिलिंग पर्वतीय इलाका महीनों से अशांत ही बना हुआ है। पश्चिम बंगाल से पर्वतीय इलाकों को अलग कर गोरखालैंड बनाने की मांग ने छीन रखी है इलाके की शांति। गोरखा जनमुक्ति मोर्चे के इस आंदोलन से निपटने के लिए ममता बनर्जी अब दांव-पेच पर उतर आई हैं। आंदोलनकारियों में फूट डालने का दांव चला है। जून से जारी इस आंदोलन को शुरू में तो उन्होंने ज्यादा भाव दिया नहीं था लेकिन पिछले दिनों दो बम विस्फोट हुए तो जनमुक्ति मोर्चे के नेता बिमल गुरुंग को लपेट दिया। गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) कानून के तहत मामला दर्ज कर दबाव बढ़ा दिया। असर भी दिखने लगा है। अब गोरखा जनमुक्ति मोर्चा सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बातचीत की पहल कर रहा है।

हालांकि आंदोलन को जारी रखने के लिए पर्वतीय क्षेत्र की छोटी-बड़ी तमाम सियासी पार्टियों को लेकर गोरखालैंड मांग समन्वय समिति बन गई है। इसमें शामिल गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने तो केंद्र और राज्य सरकार को पत्र भी लिखा है। ममता बनर्जी ने भी पत्र मिलते ही बातचीत न्योता भेजने में देर नहीं लगाई। कोलकाता के राज्य सचिवालय में 29 अगस्त को होगी बातचीत। इसमें भी तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने चाल खेल दी। गोरखा जनमुक्ति मोर्चे को सीधे नहीं दिया है बातचीत का न्योता। नतीजतन पर्वतीय दलों का असमंजस बढ़ता ही। तय नहीं कर पा रहे कि बैठक में जाएं या नहीं। यह तो फूट डालो और राज करो की रणनीति लग रही है सियासी पंडितों को।

संघी निगरानी
राजस्थान भाजपा में जैसे ही संगठन महामंत्री की नियुक्ति की खबर आई, संघी खेमे के नेताओं के चेहरे खिल गए। नौ साल से कोई था ही नहीं इस पद पर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री रहे चंद्रशेखर अब जयपुर में भाजपा के राजस्थान प्रदेश के संगठन महामंत्री बन गए हैं। इस नियुक्ति से पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर असर पड़ना तय है। संगठन महामंत्री के पद पर आरएसएस अपने किसी पूर्णकालिक प्रचारक की नियुक्ति कर भाजपा की लगाम परोक्ष रूप से अपने हाथ में रखता है।

नियुक्ति की हवा तो अमित शाह के जयपुर दौरे के वक्त पिछले महीने ही बहने लगी थी। खास बात यह है कि चंद्रशेखर राजस्थान के नहीं हैं। अतीत में दो संगठन महामंत्री रहे और दोनों ही राजस्थानी थे जिनमें एक ओम माथुर तो इस समय भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। चंद्रशेखर के दाखिले ने गैरसंघी भाजपाइयों के चेहरों पर चिंता की लकीरें बढ़ाई हैं। इसे वसुंधरा राजे के एकाधिकार में हस्तक्षेप के नाते भी देख रहे हैं कुछ लोग।

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