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राजपाटः यक्ष प्रश्न

वक्त ने पलटी मारी और चिन्मयानंद बगावत कर 2005 में साध्वी उमा भारती की पार्टी में जा मिले। राजनाथ सिंह से कभी उनकी पटी नहीं। लिहाजा उनके अध्यक्ष रहते भाजपा में खुद को असहज पा रहे थे। उमा भारती की तो वक्त के साथ भाजपा में वापसी हो गई पर चिन्मयानंद का सियासी वनवास खत्म नहीं हो पाया।

Author Updated: February 28, 2020 11:28 PM
कॉलेज की एक छात्रा के यौन शोषण के आरोप में जेल चले गए। बदनामी ने सारी प्रतिष्ठा पर कालिख पोत दी। बमुश्किल महीनों जेल में काटने के बाद छूट पाए जमानत पर। तभी से बेचैन हैं। चेलों ने चार मार्च को हरिद्वार बुलाया है। परमार्थ आश्रम में स्वागत की तैयारियां हो रही हैं।

स्वामी चिन्मयानंद अपनी खोई प्रतिष्ठा की वापसी के लिए व्याकुल बताए जा रहे हैं। रामजन्म भूमि आंदोलन के दौर में सियासत में आए चिन्मयानंद का भी कभी सुनहरा वक्त था। हरिद्वार और शाहजहांपुर के उनके आश्रमों में तब संघ, विहिप और भाजपा का कौन कद्दावर नेता परिक्रमा नहीं करता था। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार मेंं गृह राज्य मंत्री यों ही नहीं बनाए गए थे। कहावत तो यही है कि साधू की कोई जात नहीं होती पर चिन्मयानंद को भाजपा ने अपने सियासी फायदे के लिए राजपूत नेता की छवि में फिट कर दिया था।

वक्त ने पलटी मारी और चिन्मयानंद बगावत कर 2005 में साध्वी उमा भारती की पार्टी में जा मिले। राजनाथ सिंह से कभी उनकी पटी नहीं। लिहाजा उनके अध्यक्ष रहते भाजपा में खुद को असहज पा रहे थे। उमा भारती की तो वक्त के साथ भाजपा में वापसी हो गई पर चिन्मयानंद का सियासी वनवास खत्म नहीं हो पाया। ऊपर से पिछले दिनों अपने कॉलेज की एक छात्रा के यौन शोषण के आरोप में जेल चले गए। बदनामी ने सारी प्रतिष्ठा पर कालिख पोत दी।

बमुश्किल महीनों जेल में काटने के बाद छूट पाए जमानत पर। तभी से बेचैन हैं। चेलों ने चार मार्च को हरिद्वार बुलाया है। परमार्थ आश्रम में स्वागत की तैयारियां हो रही हैं। लंबे अरसे बाद आएंगे अपने आश्रम में। कभी विहिप की पहली धर्म संसद और केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक चिन्मयानंद की इच्छा पर हरिद्वार में ही हुई थी। अतीत में हरिद्वार के हर कुंभ में अहम भूमिका निभाते थे। हरिद्वार को उत्तराखंड में मिलाने के फैसले के पीछे भी वही थे। आश्रम में चार मार्च को अब कौन-कौन आएंगे स्वामी चिन्मयानंद के स्वागत में, धर्मनगरी में यही है आजकल कौतुहल का विषय।

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