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राजपाटः कांटों भरी राह

त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी छवि को लेकर कुछ ज्यादा ही चौकन्ने हैं। आलोचक उन पर ढिलाई के साथ सरकार चलाने के आरोप जड़ कर उन्हें कमजोर मुख्यमंत्री के तौर पर दिखाना चाहते हैं।

Author April 7, 2018 3:43 AM
त्रिवेंद्र सिंह रावत

त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी छवि को लेकर कुछ ज्यादा ही चौकन्ने हैं। आलोचक उन पर ढिलाई के साथ सरकार चलाने के आरोप जड़ कर उन्हें कमजोर मुख्यमंत्री के तौर पर दिखाना चाहते हैं। लेकिन रावत को परवाह नहीं। वे तो शुरू से ही मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय दोनों को भ्रष्टाचार व दलाल मुक्त करने की जिद पकड़े हैं। यह बात अलग है कि नौकरशाही के जाल को काट पाना अभी भी उनके लिए सरल नहीं है। मसलन, सूबे के निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस तय करने के मामले में करामाती अफसर अपना खेल खेलने में कामयाब हो गए। पर रावत ने भी हार नहीं मानी है।

भनक लगते ही मंत्रिमंडल के फैसल को वापस ले लिया। भले सरकार की कार्यप्रणाली की चाहे जितनी फजीहत हुई हो। संघी प्रचारक की पृष्ठभूमि वाले रावत ने सचिवालय में जगह-जगह दीवारों पर लिखवा दिया कि दलालों से सतर्क रहें। अपने भरोसेमंद अफसर सूबे के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश की सलाह को रावत लगातार महत्त्व देते रहे हैं। रावत की चौकसी के बावजूद भाजपा के भीतर ही उन्हें पसंद नहीं करने वाले नेता तो कब से अठखेलियां कर रहे हैं कि जल्द ही रावत की जगह मदन कौशिक बन जाएंगे सूबे के मुख्यमंत्री। मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के बाद अभी भी खुद को सबसे ताकतवर तो मानते भी हैं कौशिक।

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