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राजपाटः शह और मात

लोकसभा और विधानसभा की एक-एक सीट के उपचुनाव तक में एक दूसरे की लानत-मलानत करने से नहीं चूकी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा।

Author January 27, 2018 3:49 AM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

लोकसभा और विधानसभा की एक-एक सीट के उपचुनाव तक में एक दूसरे की लानत-मलानत करने से नहीं चूकी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा। पश्चिम बंगाल में तो सियासत जैसे स्वाभाविक न होकर दुश्मनी का खेल बन गई। इस साल सूबे में पंचायत चुनाव होने हैं। भाजपा अभी सत्ता का ख्वाब तो नहीं देख रही पर प्रमुख विपक्षी दल बनने की जिद जरूर ठान चुके हैं अमित शाह और उनके कारिंदे। यह बात अलग है कि उपचुनाव में पार्टी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। नोआपाड़ा की विधानसभा सीट के लिए पार्टी की घोषित उम्मीदवार ने ही किरकिरी करा दी। अपनी उम्मीदवारी के एलान के चंद घंटों के भीतर ही भाजपा के प्रस्ताव को यह कह कर नकार दिया कि वे तो ममता बनर्जी की सिपाही ठहरीं। जबकि वे खुद तृणमूल कांग्रेस की विधायक रही हैं और ममता ने उन्हें टिकट भी नहीं दिया है।

बहरहाल सिर मुड़ाते ही ओले पड़े तो दूसरे उम्मीदवार को तलाशना पड़ गया। मतदान 29 जनवरी को होगा लेकिन जैसे-जैसे घड़ी की सुई उलटी घूमने लगी भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोपों की बौछार कर दी। अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के भयादोहन का आरोप जड़ दिया। और तो और मतदाताओं तक को धमकाने का भी लगा दिया ममता समर्थकों पर इल्जाम। अपनी घोषित उम्मीदवार के मैदान छोड़ भागने को भी ममता समर्थकों के खौफ का अंजाम बता रहे हैं भाजपाई। पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को परवाह नहीं। भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर ममता के कारिंदों ने तपाक से कह दिया कि भाजपा को तो प्रचार में बने रहने के लिए प्रलाप की आदत पड़ चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने तो दंभ के साथ पहले ही कर दी भाजपा के उम्मीदवारों की हार की भविष्यवाणी। ऊपर से तुर्रा अलग की निराधार आरोपों से अखबारी सुर्खियां तो हिस्से आ सकती हैं पर जनाधार बढ़ने से रहा।

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