Opinion about Nitish Kumar & Lalu Prasad politics - Jansatta
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राजपाटः हाथी के दांत

सियासत में अब लोगों को कोई नेता महात्मा गांधी की तरह नहीं भाता।

Author February 10, 2018 3:45 AM
पीएम के साथ नीतीश कुमार।

सियासत में अब लोगों को कोई नेता महात्मा गांधी की तरह नहीं भाता। कथनी-करनी में फर्क शायद ही कोई नेता न करता हो। नीतीश कुमार को ही देख लीजिए। कभी एक खास नाम से भी बिदकते थे। डेढ़ दशक पुराना गठबंधन एक झटके में तोड़ दिया था। फिर उनसे हाथ मिलाया तो निकटता के मामले में सभी गैरभाजपाई मुख्यमंत्रियों को पछाड़ दिया। केंद्र सरकार की कृपा के फायदे भी कम नहीं होते। मसलन, बिहार के मुख्यमंत्री को अब दिल्ली में सरकारी घर मिल गया है। इससे पहले दिल्ली आते थे तो सरकारी भवनों बिहार निवास और बिहार भवन में ही बनाना पड़ता था अपना ठिकाना। इसी तरह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो एक अणे मार्ग के सरकारी मुख्यमंत्री आवास को लेकर एकदम वीतरागी भाव दिखाया था। लालू की खिल्ली उड़ाते हुए तंज कसा था कि इतना बड़ा घर उनके किस काम का।

उनके लिए तो इस घर का आउटहाउस ही काफी होगा। लेकिन वक्त बीता तो वही एक अणे मार्ग छोटा लगने लगा। दूसरे जुड़े बंगले दो अणे मार्ग को भी इसमें जोड़ लिया। इसके अलावा पटना के सर्कुलर रोड पर सात नंबर वाला सरकारी बंगला अलग ठहरा। यानी अब एक तरह से तीन बंगले हैं सादगी की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री के पास।

केंद्र की कृपा से अब तो जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा भी पा गए हैं। लालू के पास लंबे अर्से तक रही यह हैसियत केंद्र सरकार ने पिछले दिनों छीन ली थी। नीतीश खुद को किसी से कोई खतरा बेशक न मानते हों पर सवाल स्टेटस का हो तो यह सुविधा लेने में बुराई क्या है? बिहार में कहावत तो यह है कि प्रेम न हाट बिकाय। पर सियासी आत्मीयता का अंदाज हर कोई तो लगा नहीं सकता।

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