ताज़ा खबर
 

राजपाटः धौंसपट्टी

पश्चिम बंगाल में अभी तो दीदी का ही दबदबा है। जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर।
Author April 14, 2018 01:40 am
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Photo Source: PTI)

पश्चिम बंगाल में अभी तो दीदी का ही दबदबा है। जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की दादागीरी में कोई कमी नहीं दिख रही। अगले महीने होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष न केवल आरोप प्रत्यारोप में उलझे हैं बल्कि कानूनी दांवपेच भी लड़ा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के अनेक उम्मीदवार तो बाहुबल से पंचायत की अनेक सीट निर्विरोध हथिया चुके हैं। तभी तो विपक्ष के इस आरोप को बल मिला है कि तृणमूल के उम्मीदवारों ने विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन ही दाखिल नहीं करने दिए। आंकड़े भी साक्षी हैं। तीन स्तर वाली पंचायत प्रणाली के तहत करीब 58 हजार सीटें हैं सूबे में।

10 हजार से ज्यादा सीटें सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार चुनाव से पहले ही जीत चुके हैं। पिछले चुनाव में निर्विरोध 6274 जीते थे। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़े बोल रहे हैं कि भाजपा आधी से ज्यादा, कांग्रेस 87 फीसद और माकपा 70 फीसद सीटों पर उम्मीदवार खड़े ही नहीं कर पाई। बीरभूम जिला परिषद में तो तृणमूल कांग्रेस ने कमाल कर दिखाया। यहां कुल 42 सीटें हैं। एक को छोड़ बाकी पर इस पार्टी के उम्मीदवार बिना कोई मेहनत किए निर्विरोध चुन लिए गए। विपक्ष इस चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग कर रहा है। सूबे की पुलिस की देखरेख में उसे निष्पक्ष और बेखौफ चुनाव का भरोसा है ही नहीं।

पर ममता सरकार तो केंद्रीय बलों की तैनाती का एड़ी-चोटी का जोर लगाकर कर रही है हर जगह विरोध। अभी तो नामांकन की प्रक्रिया ही शुरू हुई है पर हिंसक झड़पों की खबरें तमाम इलाकों से आने लगी हैं। दो लोगों की तो मौत भी हो चुकी है। मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आएगी, हिंसा की घटनाएं बढ़ने का अंदेशा भी बढ़ता जाएगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App