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राजपाटः शह और मात

नीतीश कुमार नहले पर दहला जड़ने के हुनर में पारंगत ठहरे। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और अपनी अलग पार्टी चलाने वाले अति दलित नेता जीतनराम मांझी लालू यादव की पार्टी के साथ चले गए।

Author March 10, 2018 1:58 AM
सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और अपनी अलग पार्टी चलाने वाले अति दलित नेता जीतनराम मांझी लालू यादव की पार्टी के साथ चले गए। पहले वे राजग में थे। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश ने ही बनाया था।

अनिल बंसल

नीतीश कुमार नहले पर दहला जड़ने के हुनर में पारंगत ठहरे। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और अपनी अलग पार्टी चलाने वाले अति दलित नेता जीतनराम मांझी लालू यादव की पार्टी के साथ चले गए। पहले वे राजग में थे। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश ने ही बनाया था। लेकिन बाद में हटाया तो वे खफा हो गए। जद (एकी) को छोड़ अपनी अलग हिंदुस्तानी अवाम पार्टी बनाई। पर विधानसभा चुनाव में राजद, जद (एकी) और कांग्रेस के महागठबंधन के आगे भाजपा की अगुआई वाला राजग ढेर हो गया। मांझी अकेले ही जीत पाए अपनी पार्टी से विधानसभा चुनाव। नीतीश की भाजपा के साथ हुई दोस्ती के बाद से खुद को उपेक्षित पा रहे थे मांझी।

लिहाजा राजद में चले गए। नीतीश के लिए यह बड़ा बेशक न सही पर झटका तो था ही। फिर भी कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझा। अलबत्ता पलटवार कर अपना सियासी हुनर दिखा दिया। कांग्रेस के चार विधान परिषद सदस्यों को अपनी पार्टी में शामिल कर दिखाया। परिषद में कांग्रेस की संख्या कुल छह थी। अब दो ही बचे हैं। जिन चार को पटाया है, उनमें कांग्रेस के सूबेदार रह चुके अशोक चौधरी भी हैं। राजद की अगुआई वाले महागठबंधन को एक तरह से 440 वोल्ट का कंरट लगा दिया।

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एक तरह से शह और मात का सिलसिला ही शुरू हो गया है बिहार में। राजद ने भी अब निशाना रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी पर लगाया है। पासवान मे दामाद अनिल साधु राजद में शामिल हो गए हैं। अब हर कोई कौतुहल से अगले मोहरे की प्रतीक्षा में है।

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