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राजपाटः कौन किसका सगा

यह अभी तय नहीं है कि जगत प्रकाश नड्डा अपनी टीम का गठन पहले करेंगे या प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल का विस्तार पहले होगा। इस बीच नड्डा ने कई राज्यों में पार्टी के नए सूबेदार जरूर बना दिए।

पांच अगस्त को राममंदिर के शिलान्यास के बाद खत्म हो जाएगा ज्योतिरादित्य सिंधिया का मंत्री पद का इंतजार।

ज्योतिरादित्य सिंधिया को उम्मीद तो जुलाई में ही केंद्र में मंत्री बन जाने की रही होगी पर अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास को देखते हुए फिलहाल भाजपा संगठन और मोदी सरकार दोनों का ही संभावित फेरबदल और विस्तार कुछ दिन टल गया लगता है। मध्य प्रदेश की खाली 27 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की तारीखों का एलान भी कोरोना के मद्देनजर चुनाव आयोग ने टाल दिया है। अनिश्चय की छाया बिहार विधानसभा चुनाव पर भी फिलहाल तो मंडरा ही रही है। यह अभी तय नहीं है कि जगत प्रकाश नड्डा अपनी टीम का गठन पहले करेंगे या प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल का विस्तार पहले होगा। इस बीच नड्डा ने कई राज्यों में पार्टी के नए सूबेदार जरूर बना दिए। जून-जुलाई में सोमूवीर राजू (आंध्र), विष्णुदेव साय (छत्तीसगढ़), सीआर पाटील (गुजरात), सुरेश कश्यप (हिमाचल, ओमप्रकाश धनखड़ (हरियाणा), आदेश गुप्ता (दिल्ली) और जेटी नामग्याल (लद्दाख) को संगठन का जिम्मा सौंपा जा चुका है। पांच अगस्त को राममंदिर के शिलान्यास के बाद खत्म हो जाएगा ज्योतिरादित्य सिंधिया का मंत्री पद का इंतजार।

राजपाटः निराशा का मंजर

जात न क्षेत्र
उत्तराखंड की नौकरशाही को नया मुखिया देने में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोई देर नहीं की। जबकि उत्तर प्रदेश में इसका उलटा हुआ था। राजेंद्र तिवारी को योगी आदित्यनाथ ने देर से नियमित मुख्य सचिव बनाया था। देरी सवाल तो खड़े करती है। मुख्यमंत्री को पहले से पता होता है कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक कब रिटायर होंगे। सारे अफसरों की मेरिट का आकलन भी उनके दिमाग में रहता ही होगा। फिर भी देरी होती है तो जाहिर है कि चयन को जातिवाद-क्षेत्रवाद प्रभावित करते होंगे। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपर मुख्य सचिव और सूबे में कार्यरत 1987 बैच के ओम प्रकाश को एक दिन पहले ही नया मुख्य सचिव बना दिया। उत्पल कुमार सिंह शुक्रवार को रिटायर हुए पर ओम प्रकाश ने एक दिन पहले ही कमान संभाल ली। बिहार के हैं ओम प्रकाश। त्रिवेंद्र सिंह रावत को उनकी निष्ठा, कार्यकुशलता और दक्षता पर भरोसा दूसरों से ज्यादा है। रावत जब कृषि मंत्री थे तो ओम प्रकाश उस महकमे के सचिव थे। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक हर मुख्यमंत्री अपने सबसे भरोसेमंद अफसरों को ही बनाता है। ओम प्रकाश पहाड़ के ज्यादातर भाजपाई और कांग्रेसी नेताओं को भाते नहीं। चर्चा है कि उत्पल कुमार सिंह को भी त्रिवेंद्र सिंह रावत किसी आयोग का अध्यक्ष बनाने का भरोसा दे चुके हैं। ओम प्रकाश ने कामकाज संभालते ही तीन जिलों के कलेक्टर व कुछ और अफसरों के तबादले कर बदलाव की
सुगबुगाहट दिखा दी है।

प्रस्तुतिः अनिल बंसल

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