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राजपाटः सियासी हमाम

बिहार में भूमिहारों के विश्वामित्र माने जाते हैं। पहली बार 1998 में लोकसभा में आए थे। फिर 1999 में भी दोबारा जीते। वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन 2004 में हार गए तो भी जातीय प्रभुत्व से पार्टी में कद नहीं घटा। भाजपा ने 2008 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया।

Author Published on: March 14, 2020 3:25 AM
BJP में शामिल हुए कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्वागत करते समर्थक। (फोटोः PTI)

अनिल बंसल

राजनीति के हमाम में अब हर कोई नंगा ही नजर आता है। पर उपदेश कुशल बहुतेरे को चरितार्थ करता हुआ। किसी दौर में कांग्रेस पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप आम था। प्रखर समाजवादी राम मनोहर लोहिया तो वंशवाद और जातिवाद के लिए कांग्रेस पर जीवन भर प्रहार करते रहे। पर उनके चेलों ने साबित कर दिखाया कि मौका मिले तो हर कोई वंशवाद को बढ़ावा देगा। हरियाणा में देवीलाल, बंसीलाल व भजनलाल और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव व बिहार में लालू यादव इसकी मिसाल हैं। भाजपा इस मामले में औरों से भिन्न होने की दुहाई देती थी। पर अब उसने भी इस मुद्दे से पल्ला झाड़ लिया है।

सुविधा की राजनीति सभी को रास आती है। भाजपा में नए-नए आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार पर गौर कीजिए। उनकी दादी विजया राजे सिंधिया ने तो ताउम्र कुर्सी की सियासत की ही, बेटा माधव राव सिंधिया व दो बेटियां वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे भी उनके जीवन काल में ही राजनीति में स्थापित हो गए थे। और तो और राजमाता के प्रभाव से उनकी भाभी माया सिंह को भी भाजपा ने सब कुछ दिया। वसुंधरा के रहते बेटा दुष्यंत सांसद बना तो ज्योतिरादित्य ने पिता माधव राव की विरासत उसी तर्ज पर संभाल ली जैसे रियासतों के दौर में होता था। भाजपा की और भी कितनी मिसालें दी जा सकती हैं। प्रेम कुमार धूमल-अनुराग ठाकुर, कल्याण सिंह- राजवीर सिंह- प्रेमलता-संदीप सिंह, राजनाथ सिंह-पंकज सिंह, लालजी टंडन-गोपालजी टंडन, भैरोसिंह शेखावत- नरपत सिंह राजवी और अब बिहार में सीपी ठाकुर के बाद उनके बेटे विवेक ठाकुर का नया अवतरण। सीपी ठाकुर इस समय राज्यसभा सदस्य हैं।

बिहार में भूमिहारों के विश्वामित्र माने जाते हैं। पहली बार 1998 में लोकसभा में आए थे। फिर 1999 में भी दोबारा जीते। वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन 2004 में हार गए तो भी जातीय प्रभुत्व से पार्टी में कद नहीं घटा। भाजपा ने 2008 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया। लगातार दो बार यानी पूरे बारह साल सदस्य रहे ठाकुर अब 89 साल के हैं। सो, बेटे विवेक को सौंप दी पार्टी ने पिता की राज्यसभा सीट। हालांकि चुनावी जंग में उनका रिपोर्ट कार्ड हार से भरा पड़ा है। दो बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। तो भी पार्टी ने 2013 में विधान परिषद की एक खाली सीट के उपचुनाव में उन्हें एक साल की विधायकी नवाजी थी। भाजपा ने भले वंशवाद को बढ़ावा दिया हो, पर बिहार में उसकी सहयोगी जद (एकी) का रिपोर्ट कार्ड इस मामले में सुथरा है। नीतीश के परिवार का कोई सदस्य राजनीति में है ही नहीं। इस बार भी राज्यसभा की दोनों सीटों में से एक उपसभापति हरिवंश को दे दी तो दूसरी पर पिछड़े तबके के खांटी समाजवादी कर्पूरी ठाकुर के बेटे को बनाया है उम्मीदवार।

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