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राजपाट: मुद्दा बैठे बिठाए

असम के तिनसुकिया जिले में संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में पांच बंगालियों की हत्या क्या हुई, ममता बनर्जी को लोकसभा चुनाव से पहले अहम मुद्दा मिल गया। सूबे में न्यूनतम 22 सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर चुकी भाजपा को इस घटना ने बैकफुट पर ला दिया है।

Author November 10, 2018 4:55 AM
ममता बनर्जी (Photo Source: PTI)

असम के तिनसुकिया जिले में संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में पांच बंगालियों की हत्या क्या हुई, ममता बनर्जी को लोकसभा चुनाव से पहले अहम मुद्दा मिल गया। सूबे में न्यूनतम 22 सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर चुकी भाजपा को इस घटना ने बैकफुट पर ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इन हत्याओं को एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस से तो जोड़ा ही है, इसके विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन भी किए हैं। असम में एनआरसी से बाहर छूट गए लाखों बंगालियों के मुद्दे को फिर उभार दिया है। केंद्र सरकार पर असम से बंगालियों को खदेड़ने की साजिश का आरोप भी जड़ दिया है। भाजपा के सूबेदार दिलीप घोष क्या बोलते? लाज बचाने की गरज से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिख दिया कि असम की घटना की जांच कराएं। जबकि ममता बनर्जी ने तो बाकायदा अपना एक प्रतिनिधिमंडल भी मौके पर भेज दिया था। भाजपा ने अब प्रत्यारोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस दोनों ही अपनी सियासी रोटियां सेंक रही हैं। बेचारे दिलीप घोष को समझ नहीं आ रहा कि असम में एनआरसी से बाहर छूट गए चालीस लाख बंगालियों के मुद्दे को आक्रामक अंदाज में उठाने की ममता बनर्जी की रणनीति का कैसे मुकाबला करें? कैसे आलाकमान के मिशन 22 प्लस को परवान चढ़ा पाएंगे। जबकि ममता दो कदम आगे बढ़ कर कह रही हैं कि असम से आने वाले सभी बंगालियों को वे अपने सूबे में शरण देंगी।

सीडी संस्कृति
उत्तराखंड में भाजपा पिछले कुछ दिनों से साख के संकट से जूझ रही है। पार्टी के एक अहम पदाधिकारी का मोबाइल इन दिनों बंद है। इस पदाधिकारी के सैक्स स्कैंडल की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैली हैं। आपत्तिजनक सीडी किसी ने स्टिंग करके ही बनाई होगी। पर पार्टी का कोई पदाधिकारी बोल नहीं रहा। सूत्रों के हवाले से अलबत्ता अखबारों में यह खबर जरूर छप गई कि बदनामी के डर से आलाकमान ने इस पदाधिकारी की छुट्टी कर दी है। चर्चा तो यहां तक है कि ये महाशय अपनों के ही बिछाए जाल में फंस गए। इस विवाद की आंच सूबे के एक काबीना मंत्री तक भी पहुंची है। हालांकि विरोधी दलों की इसमें कोई भूमिका नहीं। हैरानी की बात है कि पार्टी के सूबेदार अजय भट्ट और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले भाजपा के ही एक राष्ट्रीय पदाधिकारी पर पश्चिम बंगाल में इसी तरह के स्कैंडल में फंसने के आरोप सामने आ चुके हैं। ये महाशय भी पहले उत्तराखंड के सर्वेसर्वा थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले में एक गिरफ्तारी कर भी ली है। पुलिस का फंदा अपनी गर्दन की तरफ बढ़ता देख अदालत की शरण में गए हैं। पाठकों को बता दें कि भाजपा में सीडी संस्कृति नई नहीं है। इससे पहले भी पार्टी के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी की आपत्तिजनक सीडी पार्टी के अधिवेशन में बंटी थी। ये महाशय नागपुर के निवासी हैं और एक जमाने में गुजरात भाजपा के संगठन मंत्री थे। सीडी के बाद पार्टी से ऐसे बाहर हुए कि दोबारा दाखिल होने के लिए तरस गए।

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