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राजपाट: भोज के बहाने

जयपुर के मौजूदा भाजपा सांसद रामचरण बोहरा की जगह दावा जता रही हैं दिया कुमारी। हालांकि कांग्रेस भी उन्हें पलकों पर बिठाने को आतुर है। कांग्रेस तो कह भी चुकी है कि भाजपा में सम्मान न मिले, तो कांग्रेस में स्वागत है उनका। इस पेशकश के बाद भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ी है।

राजस्‍थान के अंतिम महाराज बृज भवानी सिंह की बेटी हैं दिया कुमारी (फोटो सोर्स : Express Group Photo)

लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान में भाजपा के कई नेताओं के रिश्ते बदलने लगे हैं। विधानसभा चुनाव की हार के बाद लोकसभा सदस्यों पर भी टिकट कटने की तलवार लटकी है। पिछली दफा सूबे की सभी 25 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने परचम फहराया था। हालांकि पिछले साल उपचुनाव में अलवर और अजमेर की सीटें भाजपा से छिन गई थीं। बहरहाल आलाकमान कुछ मौजूदा सांसदों का पत्ता काटने के संकेत दे चुके हैं। इसी का नतीजा है कि लोकसभा टिकट के नए दावेदार अब सामने आ रहे हैं। शुरुआत जयपुर शहर से हो चुकी है। जयपुर राजघराने की राजकुमारी दिया कुमारी ने इस सीट पर दावेदारी जता दी है। दिया कुमारी पूर्व में विधायक रह चुकी हैं पर वसुंधरा राजे से उनके रिश्ते खट्टे हो गए थे। अपने जन्मदिन के मौके पर दिया कुमारी ने एक बड़े भोज का गुलाबी नगरी में आयोजन किया। दलगत राजनीति को भुला तमाम नामचीन हस्तियां इस भोज में शरीक हुईं। खुद वसुंधरा राजे भी अपने सांसद पुत्र दुष्यंत के साथ जा पहुंचीं दिया कुमारी की पार्टी में। जयपुर शहर के तमाम बड़े कांग्रेसी नेता भी दिखे।

जयपुर के मौजूदा भाजपा सांसद रामचरण बोहरा की जगह दावा जता रही हैं दिया कुमारी। हालांकि कांग्रेस भी उन्हें पलकों पर बिठाने को आतुर है। कांग्रेस तो कह भी चुकी है कि भाजपा में सम्मान न मिले, तो कांग्रेस में स्वागत है उनका। इस पेशकश के बाद भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ी है। जयपुर शहर से सटी जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से पिछली दफा राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जीते थे। दिखावा तो वे मैदान में पुरानी सीट से ही उतरने का कर रहे हैं पर अंदरखाने नजर जयपुर शहर सीट पर टिका रखी है। दिया कुमारी की तरह ही राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रह चुकीं सुमन शर्मा ने भी भोज के बहाने टिकट पर अघोषित दावा ठोका है। वे संघ परिवार के सहारे सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश में हैं।

नए दावेदारों की लाबिंग से मौजूदा सांसदों की नीद उड़ गई है। मसलन, कोटा से पूर्व कांग्रेसी इज्यराज सिंह ने वसुंधरा राजे के जरिए टिकट का पासा फेंका है। यह बात अलग है कि कोटा के मौजूदा सांसद ओम बिड़ला ठहरे आलाकमान के खासमखास। जो भी हो चुनावी सियासत में सूबे के पूर्व राज परिवारों की दिलचस्पी अचानक बढ़ी है। वे भाजपा आलाकमान तक यह मंत्र फूंकने की कवायद में जुटे हैं कि इस बार घड़ी मुश्किल है सो वे ही लगा सकते हैं मझधार में फंसी पार्टी की नैया पार।

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