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हरियाणा सरकार और बीजेपी संगठन में नहीं सबकुछ सामान्य

खट्टर के प्रति लगातार बढ़ रही नाराजगी से संकेत तो यही मिल रहे हैं कि वे अपना कार्यकाल शायद ही पूरा कर पाएं।

Author Updated: May 22, 2017 5:36 AM
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर। (File Photo)

कांटों भरी राह
क्या हरियाणा में भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य है। पार्टी के मुखिया अमित शाह को बेशक ऐसा लगता हो पर न संगठन में सब सामान्य है और न सरकार में। तभी तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बदले जाने की अटकलें तेज हैं। चंडीगढ़ में अमित शाह ने सफाई से कह दिया कि खट्टर को बदले जाने की कोई संभावना नहीं है। लगे हाथ यह भी जोड़ दिया कि किसी मुख्यमंत्री को बदलना भी होगा तो क्या पार्टी का मुखिया इसका प्रचार पत्रकारों से करेगा। खट्टर के प्रति लगातार बढ़ रही नाराजगी से संकेत तो यही मिल रहे हैं कि वे अपना कार्यकाल शायद ही पूरा कर पाएं। दर्जनों विधायक उनसे खफा बताए जा रहे हंै। बस देरी है तो संघ परिवार के सिग्नल की। लेकिन भाजपा ने भगवा संगठन को संदेश जरूर दे दिया है कि खट्टर को बदलना और सरकार की कार्यशैली में परिवर्तन लाना लाजिमी है। विधायकों की नाराजगी की जानकारी आलाकमान को भी है। चंडीगढ़ के अपने दौरे में अमित शाह ने इसे खुद भांप भी लिया। इसी से अटकल तेज हुई है कि वे जमीनी हकीकत के आकलन के लिए जल्द ही सूबे के प्रवास पर आ सकते हैं। वैसे जुलाई में तो उनका आना पहले से ही तय बताया जा रहा है। चंडीगढ़ का दौरा तो संघ शासित क्षेत्र के भाजपा संगठन ने आयोजित किया था। भले हरियाणा के प्रभारी महासचिव अनिल जैन और राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल भी उनके साथ थे। रामलाल का भी हरियाणा की सियासत में दखल रहा है। चंडीगढ़ का कार्यक्रम था तो क्या, शाह की हाजिरी बजाने तो हरियाणा के भी कई पार्टी नेता पहुंचे थे। यहां तक कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी संजय टंडन के घर पर आयोजित अमित शाह के लंच के वक्त उनसे गुफ्तगू की। जिसमें अनिल जैन भी मौजूद थे।
निहितार्थ से टोह
सियासत में हर बात के अर्थ निकलते हैं। दिल्ली में एक किताब के विमोचन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की तारीफ क्या कर दी, उनके विरोधी खेमे की तो नींद ही गायब हो गई। मोदी ने पहले तो मंच से तारीफ की। फिर ट्वीट करके भी दोहरा दिया अपना नजरिया। हिमाचल में इसी साल होंगे विधानसभा चुनाव। स्वाभाविक दावेदार तो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए धूमल ही माने जाते हैं। पर दावेदारी तो दूसरे नेता भी कर ही रहे हैं। खासकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का नाम ज्यादा उछल रहा है। फैसला तो आलाकमान ही करेगा। लेकिन सूबे की वीरभद्र सरकार के विरोध में आंदोलन भाजपा की तरफ से धूमल ही करते रहे हैं। वीरभद्र के निशाने पर भी उन्हीं को रहना पड़ता है। जबकि दूसरे कद्दावर नेता शांता कुमार तो तारीफ ही करते हैं वीरभद्र की। वीरभद्र का रुख नड्डा के प्रति भी नरम ही दिखता है। जाहिर है कि शांता और नड्डा दोनों धूमल विरोधी खेमे के भाजपाई ठहरे। अब अगर नरेंद्र मोदी धूमल की देश की राजधानी में तारीफ करें तो विरोधियों के सीने पर सांप लोटेगा ही। मशहूर कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की किताब का किया था मोदी ने विमोचन। तभी फरमाया कि हिमाचल में धूमल के राज में सोलन जिले में मशरूम का इतना उत्पादन हुआ था कि डंका देश में ही नहीं विदेश तक में बजा था सूबे का। मोदी के सुझाव पर ही धूमल ने सोलन के रास्ते पर बोर्ड लगवाए थे वेलकम टू मशरूम सिटी। ब्रांडिंग हुई उससे। इसी तर्ज पर बाकी उत्पादों की भी ब्रांडिंग हो तो किसानों को फायदा होगा। दरअसल पहली बार धूमल जब हिमाचल के मुख्यमंत्री बने थे तो श्रेय नरेंद्र मोदी को गया था, सूबे में भाजपा के प्रभारी सचिव के नाते। अन्यथा सब यही मान रहे थे कि शांता कुमार बनेंगे मुख्यमंत्री।

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