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राजपाट- शर्मनाक करतूत

देश की सबसे साखदार जांच एजंसी मानी जाने वाली सीबीआइ ने फिर साबित कर दिया कि वह केंद्र सरकार के दबाव में काम करती है। अपने विवेक, तथ्यों और कानून के अनुसार नहीं।
Author September 25, 2017 04:08 am
सीबीआई (file photo)

देश की सबसे साखदार जांच एजंसी मानी जाने वाली सीबीआइ ने फिर साबित कर दिया कि वह केंद्र सरकार के दबाव में काम करती है। अपने विवेक, तथ्यों और कानून के अनुसार नहीं। लखनऊ के एक निजी मेडिकल कालेज की मान्यता के गोरखधंधे में पिछले हफ्ते सीबीआइ ने छह लोगों को पकड़ा। इनमें बड़ी मछली इलाहाबाद और ओड़ीशा हाईकोर्ट में जज रह चुके आइएम कुद्दुशी को माना जा रहा है। कुद्दुशी अपने जज कार्यकाल में भी विवादास्पद रहे। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक रेलवे कर्मचारी से चिढ़ कर उन्होंने प्लेटफार्म पर ही अदालत लगा रात में अदालती अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी थी। तब वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज थे। बाद में उनका ओड़ीशा तबादला हुआ।

वरिष्ठता के बावजूद न तो किसी हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बन पाए और न सुप्रीम कोर्ट जज। बहरहाल सीबीआइ उनकी तलाश में कटक तक जा पहुंची। ओड़ीशा का हाईकोर्ट कटक में ही है। हाईकोर्ट जज के पद से कुद्दुशी 2010 में रिटायर हुए थे। तभी छोड़Þना पड़ा था कटक का सरकारी बंगला। पर सीबीआइ की करामात देखिए। उनके विभिन्न ठिकानों पर छापे मारने की बात तो समझ आती है पर मति के मारे अफसरों की एक टीम कटक भी जा पहुंची। जिस बंगले में कुद्दुशी रहते थे, जाहिर है उसमें अब कोई और जज रह रहे हैं। उन्हें अखरना ही था। उनके स्टाफ ने इस बेहूदगी के लिए बाकायदा सीबीआइ के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है। जो भी हो सीबीआइ ने साबित कर दिया कि वह पूरा होमवर्क नहीं करती। इतना तो अफसरों को पता होना ही चाहिए था कि जिसके खिलाफ छापेमारी कर रहे हैं जब वह सात साल पहले रिटायर हो गया था तो फिर उसके सरकारी घर पर पहुंचने का क्या औचित्य था। सफाई देते नहीं बन रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए सीबीआइ को केंद्र सरकार का तोता बताया था। कटक के हाईकोर्ट जज के बंगले पर गलतफहमी में ही सही दस्तक देकर तो उसने साबित कर दिखाया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सटीक थी।

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