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राजपाट- प्रतिबद्धता बेमिसाल

शिवानंद तिवारी का प्रचलित नाम यही है। वे खांटी समाजवादी रामानंद तिवारी के पुत्र ठहरे। जिसके साथ रहते हैं, पूरे समर्पण और निष्ठा से रहते हैं। कभी नीतीश उन्हें भाते थे। अब लालू उनके पसंदीदा बन गए हैं।

Author July 24, 2017 7:08 AM
नीतीश कुमार के साथ शिवानंद तिवारी ।

 

प्रतिबद्धता बेमिसाल
बाबा भी रघुवंश बाबू जैसे ही हैं। बाबा का मतलब हर बिहारी बखूबी समझ जाता है। शिवानंद तिवारी का प्रचलित नाम यही है। वे खांटी समाजवादी रामानंद तिवारी के पुत्र ठहरे। जिसके साथ रहते हैं, पूरे समर्पण और निष्ठा से रहते हैं। कभी नीतीश उन्हें भाते थे। अब लालू उनके पसंदीदा बन गए हैं। फिर कुछ बोल दिया और विरोधी आग बबूला हो उठे। नीतीश का साथ यों ही नहीं छोड़ा। उन्होंने दोबारा राज्यसभा भेजने लायक नहीं माना तो जनता दल (एकी) में रहकर वे करते भी क्या। इन दिनों लालू यादव और उनका परिवार संकट से घिरा है। लिहाजा बाबा खुलकर साथ दे रहे हैं। तेजस्वी से इस्तीफा मांगने वालों की जमकर लानत मलानत कर रहे हैं। नीतीश को भी नहीं छोड़ा। उन्हें सत्ता का लोभी तक कह डाला। ऊपर से यह सवाल अलग दाग दिया कि नीतीश के इर्द-गिर्द रहने वाले सारे नेता क्या दूध के धुले हैं? नीतीश का अपना तरीका ठहरा।

एक तो किसी की बात का कभी जल्दबाजी में जवाब नहीं देते। ऊपर से जिसे अपने स्तर का नहीं समझते, उसकी बात की तो परवाह भी नहीं करते। उन्हें लगता है कि ऐसे आदमी का जवाब देने से उसका कद बढ़ेगा। पर यही सोच उनकी पार्टी के बाकी नेताओं की क्यों हो। वे तो नीतीश पर हमला करने वालों पर झपट पड़ते हैं। बाबा की भी बखिया उधेड़ रहे हैं। पर बाबा तो बाबा ठहरे। पहले ही ऐलान कर दिया था कि न तो वे अब विधानसभा में जाएंगे और न संसद का रुख करेंगे। पर किसी का विरोध या समर्थन करने से कतई संन्यास नहीं लिया है उन्होंने। खास बात यह है कि उनके कहे का असर भी होता है। तभी तो बाबा कहलाते हैं।

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