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कौन बनेगा मंत्री

केंद्रीय मंत्री से वे अब देश के उपराष्ट्रपति बनेंगे तो राजस्थान की भाजपाई सियासत पर भी असर तो पड़ेगा ही। राजस्थान से दूसरा कोई कैबिनेट मंत्री है नहीं।

Author July 24, 2017 7:13 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे

कौन बनेगा मंत्री

कहने को तो वेंकैया नायडू तेलंगाना के ठहरे। पर राज्यसभा में तो राजस्थान ने भेजा था भावी उपराष्ट्रपति को। केंद्रीय मंत्री से वे अब देश के उपराष्ट्रपति बनेंगे तो राजस्थान की भाजपाई सियासत पर भी असर तो पड़ेगा ही। राजस्थान से दूसरा कोई कैबिनेट मंत्री है नहीं। जाहिर है कि प्रधानमंत्री जब अगला फेरबदल करेंगे तो कैबिनेट में सूबे की नुमाइंदगी जरूर होगी। कम से कम अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तो यह लाजिमी माना जा रहा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर राजस्थान के लोगों ने सारी पच्चीस लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में डाल दी थी। फिलहाल अर्जुन मेघवाल, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सीआर चौधरी और पीपी चौधरी सभी केंद्र सरकार में राज्यमंत्री ठहरे। एक और राज्यमंत्री विजय गोयल भी बेशक सियासत चाहे दिल्ली की करते हों पर राज्यसभा में तो नुमाइंदगी राजस्थान की करते हैं। वेंकैया चूंकि बड़े नेता थे सो, चाह कर भी राजस्थान के तमाम केंद्रीय मंत्री उन्हें बाहरी नहीं बता पाए। विजय गोयल को वे अलबत्ता इसी श्रेणी में रखते हैं। इस बार मुमकिन है कि भूपेंद्र यादव या ओपी माथुर की लाटरी खुल जाए। दोनों राज्यसभा में हैं। फिलहाल संगठन में अहम जिम्मा है दोनों के पास। माथुर तो देश के सबसे बड़े सूबे यूपी के प्रभारी ठहरे।

सरकार बनी थी तो चर्चाएं यहां तक सुनाई पड़ी थी कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद नहीं चाहतीं कि उनके सूबे का कोई केंद्र में कैबिनेट मंत्री हो। उनकी इच्छा तो अपने सांसद पुत्र दुष्यंत को मंत्री बनवाने की रही होगी। नायडू के इस्तीफे के बाद राज्यसभा की खाली होने वाली सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। उसके लिए भी दावेदार लाबिंग में जुट गए हैं। पार्टी की गुटबाजी पर अंकुश लगाने के लिए आलाकमान यह सीट असंतुष्ट नेता घनश्याम तिवाड़ी को सौंप दे तो हैरत नहीं होनी चाहिए। तिवाड़ी तो डंके की चोट पर कहते आ रहे हैं कि उनका विरोध वसुंधरा राजे से है, अपनी पार्टी से नहीं। विधायक किरोड़ीलाल मीणा भी इसी सुर में सुर मिलाते हैं। उनका जातीय आधार मजबूत होने के चलते भाजपा नेतृत्व अगले विधानसभा चुनाव की चिंता में उन्हें पटा सकता है। वसुंधरा राजे ने तो घनश्याम तिवाड़ी को अनुशासनहीनता की जद में फंसाने का ताना-बाना बुना था। पर वे आरएसएस की बदौलत बचे हुए हैं। जाहिर है कि राजस्थान में आने वाले दिन सियासी हलचल तेज करेंगे।

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