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राजपाट- मंत्र विकास का, जोश में सचिन

भाजपा से दोबारा दोस्ताना किया है तो केंद्र सरकार से ज्यादा धन हासिल करने की मंशा रखेंगे ही। अब तो विकास का ही सहारा है।

Author October 16, 2017 5:31 AM
नीतीश कुमार और पीएम मोदी (फोटो सोर्स – ट्विटर)

मंत्र विकास का

सियासत के बड़े चतुर खिलाड़ी बन चुके हैं अब नीकु। नीकु यानी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। भाजपा से दोबारा दोस्ताना किया है तो केंद्र सरकार से ज्यादा धन हासिल करने की मंशा रखेंगे ही। अब तो विकास का ही सहारा है। विकास के लिए धन चाहिए। नीकु बार-बार एक ही राग अलापते हैं कि उनके नेतृत्व में बिहार का विकास होकर रहेगा। ऊपर से सोने में सुहागे वाली बात यह हो गई है कि केंद्र में भी उनके अनुकूल सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों बिहार के विकास की विभिन्न योजनाओं के लिए पांच हजार करोड़ रुपए की रकम मंजूर भी कर दी। अब भाजपा भी कह सकेगी कि बिहार के विकास में उसका भी कम योगदान नहीं। वैसे भी नीकु की छवि शुरू में तो विकास पुरुष की ही थी।

पर पिछले कुछ सालों में यह छवि धूमिल हुई। लालू से नाता तोड़ने के बाद नीकु को अपनी उसी पुरानी विकास पुरुष की छवि में लौटने की फिक्र है। वे अपनी समस्याओं को समझ भी रहे हैं। जातीय समीकरणों से अब काम नहीं चलेगा। उनका भविष्य विकास के मापदंड ही तय करेंगे। विरोधी दलों के तेवर यों भी अब काफी हमलावर हैं। लिहाजा चौकस रहना जरूरी है। नीकु कहते रहे हैं कि वे किसी की लकीर को मिटाना उचित नहीं समझते। वे तो पुरानी लकीर के समानांतर अपनी और बड़ी लकीर खींचने में यकीन रखते हैं। नीकु को विरोधियों की कतई परवाह नहीं। भाजपा का साथ पकड़ने से वे तो नाक-भौं सिकोड़ेंगे ही। पर नीकु का एजंडा तो बिहार का विकास ठहरा।
जोश में सचिन
राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी है तो क्या हुआ? गुटबाजी के बीच ही पार्टी के सूबेदार सचिन पायलट ने तो अपनी उड़ान भर ही ली। इससे सत्तारूढ़ भाजपा को ही नहीं अपने दल के धुरंधरों को भी चौंका दिया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इलाके झालावाड़ और बारां में चार दिन तक किसान न्याय पदयात्रा कर भाजपा को बैकफुट पर लाने का काम कर दिखाया। इस इलाके से खुद राजे तो विधायक हैं साथ ही उनके बेटे दुष्यंत सिंह सांसद हैं। मां-बेटे को उनके ही इलाके में घेर कर भाजपा सरकार को पायलट ने घेर लिया। पायलट की इस मुहिम को पूरे कोटा संभाग के कांग्रेसियों का जबरदस्त साथ भी मिला और भीड़ भी उमड़ी। विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले पायलट ने अब उड़ान भरनी शुरू कर दी है। राहुल गांधी का करीबी होने के नाते अब यह तय है कि विधानसभा चुनाव तक पायलट ही सूबे में पार्टी की कमान संभालेंगे। इससे पार्टी का पायलट विरोधी खेमा पशोपेश में है। पायलट की अगुआई में ही प्रदेश कांग्रेस समिति ने राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पास करके भी आलाकमान की निगाह में अपना कद बढ़ाने का काम किया है।

पायलट की राह में रोड़ा सिर्फ अजमेर लोकसभा सीट का उपचुनाव बना हुआ है। अजमेर सीट पायलट की ही है,इसलिए उपचुनाव भी उन्हें ही लड़ना पड़ सकता है। जबकि वे खुद इससे बचने में ही हित भांप रहे हैं। वे तो पार्टी को विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी में जुटे हैं पर अजमेर उपचुनाव उनकी कवायद पर भारी पड़ रहा है। यों पायलट ने इसका तोड़ तलाश लिया है। आलाकमान का दबाव पड़ने की स्थिति में इस सीट से वे अपनी मां रमा पायलट को चुनाव मैदान में उतार सकते हंै। रमा पूर्व में राजनीति में रह चुकी हैं। एक बार विधायक और एक बार सांसद भी रही हैं। रमा के मैदान में उतरने से सचिन उपचुनाव के झमेले से साफ निकल कर विरोधियों को पटखनी दे सकते हैं। सूबे में भाजपा सरकार की जैसी छवि बन गई है उससे कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि आम चुनाव में राजस्थान उसके लिए फायदेमंद साबित होगा। पर मुश्किल यह है कि उपचुनाव में तो सत्ताधारी दल अलग ही अंदाज में मैदान में उतरता है। तभी तो उपचुनाव से दूरी बना कर पायलट कोई अलग रास्ता अपनाना चाहेंगे।

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