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लड्डू दोनों हाथ

राष्ट्रपति का मामला अभी ठंडा पड़ा भी नहीं था कि जीएसटी लागू करने के समारोह के बहिष्कार के कांग्रेस के फैसले को भी बिहार के मुख्यमंत्री ने धता बता दिया।

Author Published on: July 3, 2017 2:48 AM
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार। (PTI File Pic)

नीतीश कुमार अपनी अलग राह चलने के लिए जगजाहिर हैं। कब कौन सा दांव लगा दें, करीबी भी नहीं समझ पाते। राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के मामले में समूचे गैरभाजपाई विपक्ष को हैरान कर दिया। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को न केवल राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने की बधाई दी बल्कि अपनी पार्टी के समर्थन का भी एलान कर दिया। इससे पहले गैर राजग दलों में अपना उम्मीदवार खड़ा करने के बारे में मंथन जारी था। नीतीश भी उन्हीं के साथ दिख रहे थे। पर उनके अलग राह पकड़ते ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ समूचे विपक्ष को लामबंद करने की कांग्रेस और वामपंथियों की हसरत की हवा निकल गई। असली झटका तो नीतीश के बड़े भाई लालू प्रसाद को लगा। तभी तो बयान दिया कि वे नीतीश से फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह करेंगे। नीतीश ने न पुनर्विचार किया और न उन्हें करना था।

राष्ट्रपति का मामला अभी ठंडा पड़ा भी नहीं था कि जीएसटी लागू करने के समारोह के बहिष्कार के कांग्रेस के फैसले को भी बिहार के मुख्यमंत्री ने धता बता दिया। जिस नरेंद्र मोदी की सांप्रदायिकता की राजनीति से असहमत हो भाजपा के साथ दो दशक पुराने गठबंधन को एक झटके में तोड़ दिया था, उन्हीं नरेंद्र मोदी के पक्ष में खड़े हो गए नीतीश। जबकि उनकी सरकार राजद और कांग्रेस के समर्थन से ही चल रही है। समर्थन क्या गठबंधन है तीनों का। सियासी हलकों में अब हर कोई नीतीश कुमार के बारे में सवाल पूछ रहा है कि वे किस तरफ हैं। भाजपा की तरफ या फिर गैरराजग विपक्ष के साथ। क्या वे अपनी कोई अलग खिचड़ी पका रहे हंै। सियासत में कब किसे किसकी जरूरत पड़ जाए, कौन जाने। यूं भी न कोई स्थाई मित्र होता है और न स्थाई शत्रु। लगता है कि नीकू इसी नीति पर चल रहे हैं कि न कोई उनका पक्का दोस्त है और न कोई पक्का दुश्मन। यानी दोनों हाथ में लड्Þडू लेकर चल रहे हैं। मित्र धोखा दे तो शत्रु को मित्र बना लें, ऐसा सियासी कौशल नीतीश की खूबी है।

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