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राजपाट- जुबां पर पलटूराम

राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव हंसी-हंसी में गंभीर बात कर जाते हैं। पिछले दिनों चारा घोटाले के मुकदमों के सिलसिले में कई बार रांची जाना पड़ा उन्हें।

Author Updated: September 25, 2017 4:41 AM
No Serious News, Lalu Prasad Yadav, Nitish Kumar, tejaswi Yadav, deputy CM, Team India, bihar politics, बिहार, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव , लालूलालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार। (file photo)

राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव हंसी-हंसी में गंभीर बात कर जाते हैं। पिछले दिनों चारा घोटाले के मुकदमों के सिलसिले में कई बार रांची जाना पड़ा उन्हें। सीबीआइ की विशेष अदालत में मौजूद रहने की मजबूरी ठहरी। इससे बड़ा संकट और क्या होगा? लेकिन लालू फिर भी अपने माथे पर शिकन तक नहीं पड़ने देते। हंसी-ठिठोली का उनका मिजाज सनातन है। पत्रकारों के लिए तो लालू सदैव कौतूहल और खबर का विषय रहते ही हैं।

जब भी पत्रकार उन्हें घेरते हैं, पलटू राम का लालू जिक्र किए बिना नहीं रहते। पत्रकार अब उनसे सफाई नहीं मांगते कि कौन है पलटू राम। लालू तो पूरे आत्मविश्वास के साथ यह भी जताते हैं कि संकट में तो मोदी के साथ जाकर पलटूराम फंसे हैं। पत्रकारों से साफ कहा कि पलटूराम अब जहां है वहीं रहेगा। अब कहीं पलटी मार ही नहीं पाएगा। वर्षों बाद पलटी मारी थी तो महागठबंधन में आया था। फिर पलटी मार कर अपने पुराने ठिकाने पर चला गया। अब वहां से कहां जाएगा। कहीं तो ठिकाना बाकी रहा नहीं। अब तो बेचारे की दुर्गति ही होनी है। फिर सीधा हमला बोलने के अंदाज में खुलासा किए बिना नहीं रह पाए- आप लोग समझते हैं न। पलटू राम यानी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

 

विनम्रता कमाल की

बड़े पद पर आसीन होने से अहंकार का भाव जगे, ऐसा जरूरी नहीं है। अपने महामहिम ने इसे साबित किया है। महामहिम यानी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। स्वभाव सरल है और मन आस्थावादी। सो, देश के सभी प्रमुख तीर्थों पर जा रहे हैं श्रद्धा भाव से। शनिवार को हरिद्वार जा पहुंचे हर की पौड़ी पर गंगा के पूजन के लिए। बारिश को देखते हुए कार्यक्रम टाल भी सकते थे। लेकिन परिवार के साथ बारिश में ही भीगते हुए गंगा पूजन किया।

देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति का गंगा के प्रति ऐसा भक्तिभाव देख गंगा सभा के पुजारी हैरान थे। हरिद्वार में कोविंद उस कुष्ठ आश्रम में जाना भी नहीं भूले जिससे दो दशक पुराना नाता है। कुष्ठ आश्रम के दो बच्चों को गोद ले रखा है उन्होंने पढ़ाई और परवरिश के नजरिए से। यानी उनकी शिक्षा और पालन-पोषण का खर्च वे ही उठा रहे हैं। कुष्ठरोगी बच्चों से मिल कर वे भावुक हो गए। अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिस वालों के प्रति आभार जताना भी नहीं भूले। उनके बारिश में भीग जाने के लिए खुद को दोषी बताया। सदाशयता और विनम्रता से सबका दिल जीत लिया उन्होंने।

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