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राजपाट: अनहोनी का चक्रव्यूह

छठे चरण की हिंसा और मंगलवार को आलाकमान के रोड शो के दौरान दोनों पार्टियों के बीच मारपीट के बाद चुनाव आयोग ने चाबुक चलाया है। चुनाव प्रचार हिंसक रूप न ले, इसके लिए प्रचार की आखिरी समय सीमा में ऐतिहासिक कटौती की है।

Author May 18, 2019 6:22 AM
पीएम नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

पश्चिम बंगाल ने लोकसभा चुनाव में अपना अलग रंग दिखाया है। यों सूबे में सीट महज 42 हैं। पर चुनाव आयोग ने हिंसा की आशंका और अतीत दोनों को ध्यान में रख सात चरणों में मतदान कराया। एकदम उत्तर प्रदेश की तरह। यह बात अलग है कि उत्तर प्रदेश में सीट 80 ठहरी। ममता बनर्जी के सूबे से ज्यादा सीटें तो महाराष्ट्र में हैं। वहां तो और भी कम चरणों में कराया गया है मतदान। जो भी हो अभी एक चरण का मतदान बाकी है।

नौ सीटों के इसी आखिरी चरण के चक्कर में ज्यादा मारा-मारी दिखी है। इस सूबे ने मतदान के संदर्भ में भी देश में अग्रणी भूमिका अदा की है। पिछली दफा ममता बनर्जी ने 42 में से 34 सीटें जीती थीं। भाजपा को महज दो सीटों पर ही मिल पाई थी सफलता। इस बार भाजपा ने आधी से ज्यादा सीटों का लक्ष्य भी रखा है और मेहनत भी इसी हिसाब से जी-तोड़ की है।

उम्मीद यही है कि ममता का वोटबैंक भले टस से मस न हो पर वाम मोर्चे के वोटबैंक में सेंध जरूर लगाएगी उनकी पार्टी। इस बार ज्यादा सीट के दावे कर रहे हैं भाजपाई। छठे चरण की हिंसा और मंगलवार को आलाकमान के रोड शो के दौरान दोनों पार्टियों के बीच मारपीट के बाद चुनाव आयोग ने चाबुक चलाया है। चुनाव प्रचार हिंसक रूप न ले, इसके लिए प्रचार की आखिरी समय सीमा में ऐतिहासिक कटौती की है।

भाजपा इसे हल्का दंड कह रही है तो ममता चुनाव आयोग को परोक्ष रूप से भाजपा का एजंट साबित करने पर तुली है। उनकी पीड़ा को वाजिब मानने वालों की भी कमी नहीं। दरअसल मंगलवार के बवाल के बाद आयोग से शिकायत दोनों ही पार्टियों ने की थी। पर आयोग ने संज्ञान केवल भाजपा की शिकायत पर लिया। न केवल प्रचार की समय-सीमा बीस घंटे घटा दी, एक वरिष्ठ आइएएस और एक आइपीएस अफसर का तबादला भी कर दिया।

पहली बार धारा 324 का इस्तेमाल किया। ममता ने सवाल उठाया है कि आयोग को हालात खराब दिख रहे तो चुनाव प्रचार पर तत्काल प्रभाव से लगाता पाबंदी। प्रधानमंत्री की गुरुवार की दो रैलियों को ध्यान में रख पाबंदी लगाने का आरोप लगाते हुए ममता बुधवार को सारे दिन कोलकाता की सड़कों पर अपने गुस्से का इजहार करती नजर आर्इं।
(अनिल बंसल)

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