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राजपाट: किसकी लगेगी लाटरी

कुछ मंत्रियों के कामकाज से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत नाखुश बताए जा रहे हैं। मसलन, हरक सिंह रावत, अरविंद पांडेय, रेखा आर्य और मदन कौशिक जैसे मंत्री बेहतर कामकाज की लगन के बजाए गुटबाजी में सक्रिय दिखते हैं।

पीएम मोदी के साथ उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड में मंत्रिमंडल के फेरबदल की अटकलें शुरू हो गई हैं। प्रकाश पंत की पिछले दिनों कैंसर के कारण हुई मौत के मद्देनजर अब मंत्रिमंडल का विस्तार करने में और देर नहीं होगी। कुल मिलाकर इस समय तीन मंत्री पद खाली हैं। कुछ मंत्रियों के कामकाज से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत नाखुश बताए जा रहे हैं। मसलन, हरक सिंह रावत, अरविंद पांडेय, रेखा आर्य और मदन कौशिक जैसे मंत्री बेहतर कामकाज की लगन के बजाए गुटबाजी में सक्रिय दिखते हैं। अपने विवादास्पद बयानों से रावत और पांडेय तो कई बार सरकार को उलझन में भी फंसा चुके हैं। जहां तक मदन कौशिक का सवाल है, रमेश पोखरियाल निशंक से उनकी कभी नहीं पटी।

लेकिन आलाकमान ने हरिद्वार से दूसरी बार जीतने वाले निशंक को केंद्र में कैबिनेट मंत्री की हैसियत देकर कौशिक को संदेश दे दिया कि गुटबाजी ठीक नहीं। कौशिक ने हरिद्वार नगर निगम में महापौर का उम्मीदवार अपनी पसंद से तय कराया था। पर सब जगह भाजपा की लहर के बावजूद हरिद्वार में हार का मुंह देखना पड़ा। मंत्री पद की हसरत रखने वालों में मुन्ना सिंह चौहान और बिशन सिंह चुफाल आगे हैं। पर मुख्यमंत्री की भी अपनी दुविधा है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन तो कायम रखना ही पड़ता है, वरिष्ठता को भी तो नजर अंदाज नहीं कर सकते।

फिर आलाकमान खुली छूट दे तो वे अपनी पसंद से मंत्रियों का चयन करें। एक तरफ मंत्री पद पाने के लिए विधायकों में लाबिंग तेज हुई है तो दूसरी तरफ नौकरशाही में भी बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। सूबे के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव में ही समन्वय नहीं हो पाया। सो, सरकार का कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है, प्रशासन में अपेक्षित चुस्ती का भी अभाव नजर आता है। बिल्ली के भाग्य से छींका टूट गया और मोदी लहर में पांचों लोकसभा सीटें हिस्से आ गर्इं। अन्यथा राज्य सरकार के प्रदर्शन से तो आलाकमान भी संतुष्ट नहीं थे।

(प्रस्तुति : अनिल बंसल)

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