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राजपाट: सियासी दांव पेच

हरिद्वार के भाजपा विधायक और त्रिवेंद्र सरकार के मंत्री मदन कौशिक की भूमिका थी मुख्यमंत्री को जयराम आश्रम लाने में।

त्रिवेंद्र सिंह रावत संघ की पृष्ठभूमि वाले हैं।

अजातशत्रु स्वरूप में दिख रहे हैं आजकल उत्तराखंड के भाजपाई मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत। विपक्ष के नाम पर ले-देकर वजूद वाली इकलौती पार्टी तो सूबे में कांग्रेस ही ठहरी। पर इस पार्टी के एक नेता को छोड़ बाकी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं कर रहे रावत। यह नेता कोई और नहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हैं। दोनों के बीच आंकड़ा अरसे से छत्तीस का चल रहा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत संघ की पृष्ठभूमि वाले हैं। पहले पार्टी के संगठन मंत्री थे। सो सत्ता संभालते ही भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी।

राष्ट्रीय राजमार्ग घोटाले की सीबीआइ जांच कराने का एलान भी किया था। जो हरीश रावत की सरकार के वक्त हुआ बताया था। यह बात अलग है कि उन्हीं की पार्टी के कद्दावर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीबीआइ जांच को पंचर कर दिया था। त्रिवेंद्र सिंह रावत अब हरीश रावत विरोधी कांग्रेसियों से दरियादिली दिखा रहे हैं। मसलन, ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप के जयराम आश्रम के कार्यक्रम में हरिद्वार जाने से गुरेज नहीं किया।

हैरानी कांग्रेसियों के साथ-साथ भाजपाइयों को भी कम नहीं हुई। पर ब्रह्मस्वरूप की जिस खासियत ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को खींचा, वह हरीश रावत विरोधी होना है। इसका एक संकेत यह भी लगाया गया कि ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप भाजपाई बन सकते हैं। जैसे सतपाल महाराज बने थे। हरिद्वार के साधु-संतों में जयराम आश्रम की बड़ी साख है।

हरिद्वार के भाजपा विधायक और त्रिवेंद्र सरकार के मंत्री मदन कौशिक की भूमिका थी मुख्यमंत्री को जयराम आश्रम लाने में। चर्चा तो यहां तक है कि कौशिक को चुनाव जितवाने में भाजपाई ही नहीं ब्रह्मचारी समर्थक कांग्रेसी खेमे ने भी लगाया था अंदरखाने पूरा दम। पार्टी में अपनी अनदेखी से आहत जो थे ब्रह्मस्वरूप।

(प्रस्तुति : अनिल बंसल)

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