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राजपाट: पांव पर कुल्हाड़ी

अपनी इस हार के लिए दोषी ममता ही मानी जाएंगी। सूबे का आर्थिक विकास करने के बजाए उन्होंने भी वाममोर्चे की तरह अराजकता की राजनीति को बढ़ावा दिया। पार्टी में अपने भतीजे की अहमियत बढ़ाई

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (PTI Photo)

दीदी हैरान हो रही होंगी। पश्चिम बंगाल से वाममोर्चे की जड़ें उखाड़ने में बंगाल की शेरनी को पूरा डेढ़ दशक लग गया था। लेकिन अमित शाह और उनके सहयोगी कैलाश विजयवर्गीय ने तो ममता की जड़ें पांच साल में ही हिला कर रख दी। अमित शाह ने जब लोकसभा चुनाव के लिए 21 या ज्यादा का लक्ष्य रखा था तो हर कोई हैरान था। पिछले चुनाव में तो महज दो ही सीटों पर मिल पाई थी भाजपा को सफलता। विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन और भी खराब रहा था।

लेकिन इस बार भाजपा ने न केवल लोकसभा की 19 सीटें जीत ली बल्कि अपना वोटबैंक भी 17 फीसद से बढ़ाकर 40 फीसद तक पहुंचा दिया। विधानसभा की जिन आठ सीटों के लिए उपचुनाव हुआ, उनमें भी आधी सीटें भाजपा ने झटक ली हैं। पहली बार वाममोर्चे का उसी पश्चिम बंगाल में खाता तक नहीं खुल पाया जहां उसका लगातार 34 साल तक एकछत्र राज रहा था। साफ दिख रहा है कि वाममोर्चे का जनाधार ममता के विरोध में भाजपा के साथ आ गया है।

अपनी इस हार के लिए दोषी ममता ही मानी जाएंगी। सूबे का आर्थिक विकास करने के बजाए उन्होंने भी वाममोर्चे की तरह अराजकता की राजनीति को बढ़ावा दिया। पार्टी में अपने भतीजे की अहमियत बढ़ाई। अपने भरोसेमंद और कद्दावर नेताओं की अनदेखी की। जिनमें से मुकुल राय और अर्जुन सिंह सरीखे ही तृणमूल कांग्रेस के लिए विभीषण बन गए। इस सूबे में कोई भी मानने को तैयार नहीं था कि भाजपा की ऐसी जीत होगी।

हां, ममता जिस तरह शुरू से ही बौखलाहट दिखा रही थीं उससे उनकी हताशा का संकेत जरूर मिल रहा था। भाजपा नेताओं को सभाएं नहीं करने देने से लेकर मतदान के दौरान हिंसा का सहारा लेना इस बात का संकेत था कि भाजपा की जड़ें गहरी हुई हैं। वाममोर्चे और कांग्रेस के बीच तालमेल नहीं होने से भी दोनों पार्टियों को नुकसान हुआ। जंगलमहल के आदिवासी इलाकों में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ असंतोष भाजपा के काम आया। अब दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में और मजबूती से चुनौती देगी तृणमूल कांग्रेस को भाजपा। वाममोर्चे के नेता तो शुरू से ही आरोप लगा रहे हैं कि सूबे में भाजपा की बढ़त का कारण खुद ममता बनर्जी ही हैं। जो हम बोएंगे काटेंगे भी तो वही।

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