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राजपाट: जुलाहों में लट्ठमलट्ठा

ममता की बात तो वे पुलिस अफसरों के तबादलों के बहाने चुनाव आयोग पर भाजपा की कठपुतली हो जाने का आरोप लगा रही हैं। यहां तक कि सूबे में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी उन्हें भाजपा के कार्यकर्ता दिखने लगे।

ममता बनर्जी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

सीट हैं कुल 42 और तीन चरणों में मतदान निपटा है महज दस सीटों का। पर सियासी दलों की दावेदारी अभी से चालू हो गई। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ही नहीं भाजपा ने भी शुरू कर दिए अपनी जीत के दावे। गनीमत है कि कांग्रेस और वाम मोर्चे की तरफ से अभी तक नहीं की गई अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की कवायद। दीदी ने तो दो टूक कह दिया कि दस में से भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलने वाली। पर आलाकमान और उनके कारिंदे भी कम नहीं। बंपर मतदान को अपने पक्ष और ममता के विरोध में चल रही लहर बता दिया। यहां तक कि खुद प्रधानमंत्री ने भी डंके की चोट पर आसनसोल की सभा में बाबुल सुप्रियो के लिए वोट मांगते वक्त खुलासा कर डाला कि बंपर वोटिंग ने दीदी की नींद उड़ा दी है।

हार तय जानकर ही तो लगा रही हैं चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप। प्रधानमंत्री तो दस सीटों के मतदान के साथ ही तृणमूल कांग्रेस की उलटी गिनती शुरू हो जाने का दावा भी कर बैठे। फिर उनकी खिल्ली अलग उड़ाई कि मुट्ठी भर सांसदों के बल पर देख रही हैं प्रधानमंत्री बनने का सपना। यह आरोप भी जड़ दिया कि अगर प्रधानमंत्री की कुर्सी नीलामी से मिलती होती तो भ्रष्टाचार के पैसों से खरीद लेतीं। उधर एक दिन पहले ही आलाकमान फिर दोहरा गए थे कि भाजपा को सूबे में 23 सीटों पर जैसे ही कामयाबी मिलेगी नब्बे दिन के भीतर सूबे से माफिया और सिंडीकेट का राज भी खत्म हो जाएगा। रही ममता की बात तो वे पुलिस अफसरों के तबादलों के बहाने चुनाव आयोग पर भाजपा की कठपुतली हो जाने का आरोप लगा रही हैं।

यहां तक कि सूबे में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी उन्हें भाजपा के कार्यकर्ता दिखने लगे। सूबे के लोगों पर उनका भरोसा कायम है और उन्हीं से अपेक्षा भी है कि 2014 में तो भाजपा को दो सीटें मिल भी गई थीं पर इस बार खाता भी नहीं खुलेगा। वैसे अब मतदान की प्रक्रिया उत्तर से दक्षिण बंगाल की तरफ खिसक रही है। उसके साथ ही दोनों दलों के नेताओं में जुबानी जंग और गति पकड़ गई है। एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में हदों का कहीं अता-पता नहीं। नेताओं की अधीरता भी गजब है। नतीजे तो ईवीएम खुलने पर 23 मई को मिलेंगे। लेकिन वे अभी से इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं कि सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठमलट्ठा।

 

(अनिल बंसल)

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