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राजपाट: अंतहीन हिंसा कथा

विधानसभा चुनाव तो 2021 में होंगे पर उससे पहले अगले साल कोलकाता नगर निगम का चुनाव होना है, जिसे विधानसभा चुनाव के रिहर्सल के तौर पर मानते हैं सूबे के सियासी दल।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फाइल फोटो)

पता नहीं किस करवट बैठेगा पश्चिम बंगाल में सियासी दुश्मनी का ऊंट। लोकसभा में 18 सीटें जीत कर भाजपा अब विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। पार्टी के प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ठहरे सियासी रणनीति के माहिर। दोनों तरह के दावे कर रहे हैं। एक तो यही कि जब चाहें ममता सरकार गिरा सकते हैं। लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी खुद प्रधानमंत्री ने भी बोला था कि तृणमूल कांग्रेस के 42 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। चुनावी नतीजों के बाद कुछ विधायक और पार्षद तृणमूल कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए भी। कल तक जो सियासी पंडित भाजपा के आधी से ज्यादा लोकसभा सीटें जीतने के लक्ष्य को मुंगेरीलाल का हसीन सपना बता कर खिल्ली उड़ाते थे, अब तो वे भी विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्तारूढ़ होने के चमत्कार से इनकार नहीं कर रहे। बहरहाल चुनावी नतीजों ने हिंसा को और बढ़ाया है।

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्याओं के आरोप लगा रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सूबे की ममता सरकार को हिंसा पर नकेल कसने के लिए जरूरी हिदायतें दे डाली। ऊपर से भाजपा ने अपने पांच कार्यकर्ताओं की हत्या के विरोध में सूबे में काला दिवस मनाया। राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी अलग सक्रिय दिखे। इसी से अटकलें लगीं कि कहीं पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की तैयारी तो नहीं कर रहा केंद्र। राज्यपाल तो दिल्ली आकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिल भी गए। कहने को तो यह मुलाकात शिष्टाचार का तकाजा भर थी पर सूबे की जमीनी हकीकत के बाबत 48 पेज की रिपोर्ट देना कुछ और ही इंगित करता है।

यह बात अलग है कि केंद्र ने खुद कह दिया कि सूबे में राष्ट्रपति शासन की फिलहाल कोई बात नहीं है। राज्यपाल ने कोलकाता पहुंच कर सर्वदलीय बैठक भी आयोजित कर डाली। विधानसभा चुनाव तो 2021 में होंगे पर उससे पहले अगले साल कोलकाता नगर निगम का चुनाव होना है, जिसे विधानसभा चुनाव के रिहर्सल के तौर पर मानते हैं सूबे के सियासी दल। ममता ने तो दस लोगों के सियासी हिंसा में मरने की बात स्वीकार करते हुए उनमें से आठ के तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता होने का खुलासा किया है। भाजपा हिंसा के लिए सीधे ममता बनर्जी को दोष दे रही है तो ममता भी भाजपा और केंद्र पर पलटवार करने से कतई नहीं चूक रहीं। भाजपाई नहले पर हर बार उनका यही दहला पड़ता है कि केंद्र सरकार उनकी सरकार को गिराने की साजिश रच रही है।

 

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