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सियासी उठापटक और नेताओं की आपसी खींचतान

किसान आंदोलन से मजबूत हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के 2022 में भी पंजाब जीतने में बाधा बन रहे नवजोत सिंह सिद्धू के रास्ते में उनके अपने ही विधानसभा हलके के रसूखदार लोग आ रहे हैं। बगावत का झंडा उठाए सिद्धू दिल्ली रवाना हुए और अमृतसर में उनके ही खिलाफ आवाजें उठने लगीं।

उत्तराखंड के मंत्री सतपाल महराज और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह।

महाराज के काज
उत्तराखंड सरकार के मंत्रियों पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का बस नहीं चल रहा है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज अपने बयानों से राज्य सरकार को संकट में डाल रहे हैं। उन्होंने हरिद्वार में बयान दिया कि मैंने जिला प्रशासन को हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के आदेश दिए हैं और जिलाधिकारी उसके लिए जमीन ढूंढ रहे हैं। जब यह बात उत्तराखंड सरकार के शासकीय प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से पूछी गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह सतपाल महाराज का निजी बयान है।

सतपाल महाराज मुख्यमंत्री रावत की कोई परवाह नहीं करते। हरिद्वार में विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में कुंभ के समय मुख्यमंत्री ने संतों के सामने वादा किया था कि उत्तराखंड के चार धामों के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार द्वारा बनाया गए देवस्थानम बोर्ड के बारे में पुनर्विचार किया जाएगा और इस बोर्ड से 51 मंदिर बाहर किए जाएंगे। लेकिन दो महीने बाद सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री के तीर्थ पुरोहितों को शांत करने के खेल को एकाएक यह कह कर बिगाड़ दिया कि देवस्थानम बोर्ड के बारे में राज्य सरकार कोई विचार नहीं कर रही है ना ही कोई विचार करेगी। इस पर उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। सतपाल महाराज ने राज्य सरकार को उस वक्त पशोपेश में डाल दिया था जब उन्होंने कहा था कि मैं मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए अपने विधानसभा क्षेत्र की सीट खाली नहीं करूंगा जबकि मूल रूप से उनका विधानसभा क्षेत्र तीरथ सिंह रावत का विधानसभा क्षेत्र रहा है।

2017 के चुनाव में तीरथ सिंह रावत का टिकट काटकर सतपाल महाराज को दिया गया था। सतपाल महाराज कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में तो शामिल हो गए पर वे खुद को भाजपा के राजनीतिक फ्रेम में फिट नहीं कर पा रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सतपाल महाराज को उम्मीद थी कि वे भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। विधानसभा चुनाव के बाद जब उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाने की बात आई तो सतपाल महाराज ने कहा कि वे अभी राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं। फिर उन्हें हाईकमान ने पर्यटन मंत्री बनाया। त्रिवेंद्र सिंह रावत के हटने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें नहीं मिली। मुख्यमंत्री उनके बयानों पर चुप्पी साधे हुए हैं क्योंकि उन्हें सितंबर से पहले पहले विधानसभा का चुनाव लड़ना है। इसलिए मुख्यमंत्री अपनी तरफ से कोई टकराव नहीं चाहते जबकि सतपाल महाराज टकराव पैदा करने पर तुले हुए हैं। पिछले दिनों अफवाह उड़ी कि सतपाल महाराज आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार होंगे। सतपाल महाराज के मुख्यमंत्री बनने में सबसे बड़ा रोड़ा उनके भाई भोले जी महाराज हैं जो उनके खिलाफ जबरदस्त अभियान छेड़े हुए हैं। इसलिए हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम रहते हुए भोले महाराज को पूरी तवज्जो दी और अब संघ परिवार तथा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भोले महाराज को पूरी वरीयता दे रहे हैं जिससे सतपाल महाराज परेशान हैं।

चूना किसे लगा
हिमाचल प्रदेश के शिमला-बिलासपुर-कांगडा राष्ट्रीय राजमार्ग पर इन दिनों कहीं-कहीं सड़कों पर लगे पैराफिट और ढांक की ओर पत्थरों व चट्टानों पर चूना लगाया जा रहा है। बरसात शुरू होने से पहले चूना लगता देख गांव के लोग हैरान हैं। प्रदेश में मानसून पूर्व की बौछार शुरू हो ही रही है। इसके बाद मानसून भी बरसेगा। ऐसे में यह चूना बारिश के साथ ही बह जाएगा। अमूमन प्रदेश में सड़कों पर लगे पैराफिट और ढांक की ओर पत्थरों व चट्टानों में दीपावली से पहले चूना लगाने का काम होता है। लोग-बाग उस समय ही अपना घर-आंगन भी साफ करते हैं। इसके अलावा सर्दियों में पहाड़ों में धुंध खूब पड़ती है तो चूना रात को वाहनों की रोशनी पड़ने पर चमक जाता है। ऐसे में यह चूना चालकों के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन बरसात में कोई चूना नहीं लगाता है। गांव के लोग कहने लगे हैं कि यह चूना तो सीधे जनता के खजाने को लगाया जा रहा है।

एक ही कैप्टन
किसान आंदोलन से मजबूत हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के 2022 में भी पंजाब जीतने में बाधा बन रहे नवजोत सिंह सिद्धू के रास्ते में उनके अपने ही विधानसभा हलके के रसूखदार लोग आ रहे हैं। कैप्टन के खिलाफ बगावत का झंडा उठाए सिद्धू दिल्ली रवाना हुए और अमृतसर में उनके ही खिलाफ आवाजें उठने लगीं। अमृतसर (ईस्ट) सिद्धू का अपना हलका है और वहां बड़े-बड़े पोस्टर लगे… ‘कैप्टन इक ही हुंदा है…। इसके बाद एक और पोस्टर आया- ‘साड्डा सांझा नारा…कैप्टन दोबारा’। शुरू में अमृतसर की दीवारों से चिपकना शुरू हुए ये पोस्टर अब प्रदेश के हर शहर में चिपकने शुरू हो गए हैं। इस तरह के पोस्टर में आयोजनकर्ता सिर्फ अपनी और अमरिंदर की तस्वीर ही लगा रहे हैं। बीच में कोई नहीं। इसके जरिए यही बताने की कोशिश हो रही है कि कैप्टन और समर्थक के बीच और कोई नहीं। शायद उसी में आलाकमान के लिए संदेश निहित है कि सिद्धू की खुशी के लिए कैप्टन की नाक बलिदान नहीं होने देंगे। सिद्धू ने एक बार पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल पर बड़े ही मासूम अंदाज में पूछा था-कौन कैप्टन? ये उसी का जवाब है। (संकलन : मृणाल वल्लरी)

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