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सियासत में उलटफेर की बाजी और परिणाम पर शोर

हिमाचल प्रदेश में अब छोटे ठाकुर चतुर हो गए हैं। कयास है कि छोटे ठाकुर हिमाचल में उत्तराखंड जैसी कवायद होने का सपना देख रहे हैं। इसीलिए उनकी दिलचस्पी इन दिनों इस ओर बढ़ी है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर।

विवाद की आफत
उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत सरकार का विवादों से अपनापा सा हो गया है। कई फैसलों पर हंगामा मचने के बाद सरकार को उसे पलटना पड़ा है। ऐसा ही उत्तराखंड के पत्रकार दिनेश मानसेरा को लेकर हुआ। उन्हें पहले रावत के आदेश पर मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बना दिया गया और अचानक 48 घंटे के भीतर उन्हें इस पद से हटाने के आदेश भी उत्तराखंड के अतिरिक्त मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जारी कर दिए। इससे पहले भी मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने कई बयानों को लेकर विवाद में फंस गए थे जिससे उनकी जगहंसाई हुई।

तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनते ही ऐलान किया कि कुंभ में आने में किसी के लिए कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन जब 14 अप्रैल को कुंभ के मुख्य शाही स्नान के बाद कोरोना फैला और देश-विदेश में जमकर तीरथ सिंह रावत सरकार की खिंचाई हुई तो केंद्र सरकार को कुंभ के आखिरी शाही स्नान को प्रतीकात्मक रूप से मनाने की संतों से अपील करनी पड़ी। जबकि पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शुरू से प्रतीकात्मक कुंभ की बात कर रहे थे और उनसे संघ और संत नाराज हो गए थे जिसके कारण उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। पत्रकार दिनेश मानसेरा को 48 घंटे के अंदर बतौर मीडिया सलाहकार हटाने के बारे में माना जा रहा है कि कांग्रेस की दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश और एक टीवी चैनल की पृष्ठभूमि उन्हें भारी पड़ी। इंदिरा ह्रदयेश ने मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया पर सवाल पूछा है कि दिनेश के मामले में वो पलट क्यों गए। ह्रदयेश ने पूछा कि क्या यह फैसला आपने संघ के दबाव में लिया? इंदिरा ने मानसेरा की नियुक्ति को अच्छा फैसला बताया था। जाहिर सी बात है कि इसके बाद तंज तो करती हीं।

सेवा और प्रचार
पश्चिमी बंगाल के चुनाव हारने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर की नजर-ए-इनायत कोरोना संकट में घिरे हिमाचल पर पड़ने लगी है। अनुराग ठाकुर ने जरूरी चीजों की खेप दिल्ली से हिमाचल को भेजनी शुरू कर दी। उन्होंने इस खेप को हरी झंडी दिखवाई भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा से। अनुराग ने इस खेप को लेकर प्रचार भी खूब कराया कि यह सामग्री उनके निजी प्रयासों से हिमाचल को भेजी जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर थोड़े हैरान हो गए कि हमीरपुर के छोटे ठाकुर को हिमाचल में अचानक दिलचस्पी क्यों होने लगी है। हमीरपुर से बड़े ठाकुर यानी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी खासे सक्रिय हो रखे हैं। प्रदेश से बाकी सांसद भी हैं और आनंद शर्मा को छोड़ कर सभी भाजपा से हैं।

ये लोग कोई प्रचार नहीं करा रहे हैं। अनुराग ने कुछ दिन पहले अपने संसदीय हलके में तीन आक्सीजन संयंत्र लगाने का भी प्रचार किया था। तब किसी ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। इस बार लोग चौकन्ने हो गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ओहदे और उम्र दोनों में अनुराग ठाकुर से बड़े हैं। ऐसे में कायदे से वह यह खेप उन्हें सौंपते तो इन दोनों ठाकुरों की शायद प्रदेश में जय-जयकार होती। भाजपाइयों का कहना है कि प्रदेश में सत्ता केंद्र में इन दिनों बड़े ठाकुर तो जयराम ही हैं। ऐसे में अनुराग को संशय था कि अगर मुख्यमंत्री को वह यह खेप भेजते हैं तो सारा श्रेय उन्हीं को जा सकता है। ऐसे में छोटे ठाकुर नड्डा को बीच में ले आए। उनके समर्थक कहते भी हैं कि अब छोटे ठाकुर चतुर हो गए हैं। कयास है कि छोटे ठाकुर हिमाचल में उत्तराखंड जैसी कवायद होने का सपना देख रहे हैं। इसीलिए उनकी दिलचस्पी इन दिनों इस ओर बढ़ी है।

बीमार के तीमारदार
कांग्रेस नेता व छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह इन दिनों बीमार हैं। वे हिमाचल की राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान अस्पताल में कई दिनों से दाखिल हैं। उनके स्वास्थ्य में अब सुधार हो रहा है। प्रदेश के इन वरिष्ठ कांग्रेस नेता का मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खूब ध्यान रख रहे हैं। वीरभद्र सिंह का मोहाली के पास एक अस्पताल में कोरोना का इलाज हुआ था। जब उन्हें वापस राजधानी लौटना था तो जयराम ठाकुर ने उनके लिए हेलिकॉप्टर भेजा। जब वीरभद्र सिंह इंदिरा गाधी आयुर्विज्ञान अस्पताल में दाखिल हुए तो मुख्यमंत्री अपने तीन मंत्रियों के साथ तुरंत उनका हालचाल जानने अस्पताल पहुंच गए थे। मुख्यमंत्री के इन कदमों से कांग्रेसी भी गदगद हो गए थे कि मुख्यमंत्री विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का कितना ध्यान रखते हैं। पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर को इसका सियासी लाभ भी मिलता रहा है। इससे एक तो अनावश्यक रूप से कांग्रेस के निशाने पर नहीं आते हैं। वहीं उनकी छवि संवेदनशील और भले मुख्यमंत्री की बन रही है।

(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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